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गुजरात में करोड़ों की वक्फ संपत्ति का घोटला, जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Gujrat Waqf scam: गुजरात में वक्फ जमीन का आवैध ट्रस्टी बनकर 5 लोगों ने करोड़ों का घोटाला किया है, जिसका खुलासा पुलिस अधिकारियों ने की है, और इन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. पूरी जानकारी के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

 

गुजरात में करोड़ों की वक्फ संपत्ति का घोटला, जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Gujrat Waqf scam: गुजरात के अहमदाबाद में 100 करोड़ की वक्फ संपत्तयों के घोटाले में 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये आरोपी गैर कानूनी तौर पर ट्रस्टी जमालपुर इलाके में कांच नी मस्जिद (कांच की मस्जिद) और शाह बड़ा कसम ट्रस्ट की संपत्तियों से करोड़ों रुपये का किराया वसूलने रहे थे. 

दरअसल, गुजरात के जमाल पुर में मस्जिद ट्रस्ट जो की वक्फ की संपत्ति है, उसका अवैध रुप से ट्रस्टी बनकर ट्रस्ट की जमीन में मौजूद लगभग 25 से 30 दूकानों से किराया वसूल रहे थे. वहीं, अधिकारियों ने खुलासा किया कि ये लोग 15 अवासीय संपत्तियों, लगभग 200 घरों से भी किराया वसूल रहे थे. दावा है कि ये लोग लगभग 100 करोड़ रुपै अवैध रूप से वसूला है. 

बता दें कि इन आरोपियों की पहचान सलीम खान पठान, मोहम्मद यासर शेख, महमूद खान पठान, फैज मोहम्मद जोबदार और शाहिद अहमद शेख के रूप में हुई है. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि ये आरोपी हर घर से 5,000 से 7,000 रुपये और प्रति दुकान 10,000 रुपये वसूलते थे. साथ ही आरोपियों पर शाह बड़ा कासिम ट्रस्ट के दान बॉक्स से हर महीने करीब 50,000 रुपये निकालने का संदेह है. ध्यान देने वाली बात यह है कि  गुजरात वक्फ बोर्ड से कोई आधिकारिक नियुक्ति न होने के बावजूद किराएदारों और दुकानदारों से किराया वसूल रहे थे.  

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गौरतलब है कि इस मामले का खुलासा गायकवाड़ हवेली पुलिस स्टेशन में दर्ज एक शिकायत हुआ है, जिसके बारे में पुलिस का मानना ​​है कि यह लगभग दो दशकों से चल रहा था. दावा है कि वक्फ बोर्ड ने उर्दू स्कूल के निर्माण के लिए अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) को जमीन आवंटित की थी.

इमारत 2001 के भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गई थी और बाद में 2009 में इसे ध्वस्त कर दिया गया था. स्कूल का पुनर्निर्माण करने के बजाय, आरोपियों ने कथित तौर पर जमीन पर लगभग 10 दुकानें बनाईं, जिनमें से एक का इस्तेमाल मुख्य आरोपी सलीम खान द्वारा संचालित 'सोदागर कंस्ट्रक्शन' के ऑफिस के रूप में किया गया था. बाता दें कि इन संपत्तियों से होने वाली कमाई का एक भी हिस्सा वक्फ बोर्ड को नहीं मिल रहा था.

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