Gyanvapi Masjid Survey: ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी सर्वे के लिए नियुक्त किए गए कमिशन के सदस्य अजय मिश्रा को सर्वे की जानकारी मीडिया में लीक करने के इल्जाम में मंगलवार को पद से हटा दिया गया था.
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वाराणसीः वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी सर्वे के लिए नियुक्त किए गए कमिशन के सदस्य अजय मिश्रा को सर्वे की जानकारी मीडिया में लीक करने के इल्जाम में मंगलवार को पद से हटा दिया गया था. वहीं, अधिवक्ता आयुक्त पद से हटाए गए अजय मिश्रा ने अपनी सफाई में कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है और जो भी हुआ, उन्हें उसकी उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा, “मैंने जिस फोटोग्राफर को रखा, उसने धोखा दिया है. इसमें मैं क्या कर सकता हूं.“
Varanasi, UP | I've not done anything that reveals the secrecy of the matter. I was removed because of the allegations of Advocate Vishal Singh. I will respect the Court order. Whatever has happened is only because of Vishal: Ajay Mishra, Former Court Commissioner on his removal pic.twitter.com/jIyo7eqMjL
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) May 17, 2022
मैंने कोई असहयोग नहीं किया
इस सवाल पर विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने उन पर असहयोग का इल्जाम लगाया है, मिश्रा ने कहा कि “हो सकता है कि उनको लगा होगा. मेरे हिसाब से मैंने कोई असहयोग नहीं किया.“ मिश्रा ने कहा, “आयोग की कार्यवाही विशाल सिंह के ही रहनुमाई में हुई. अब विशाल जी का दिल ही जानेगा और मेरा दिल जानेगा कि मैंने उनका सहयोग किया है या नहीं.
मीडिया में लगातार गलत बयान दे रहे थे मिश्राः विशाल सिंह
दरअसल, ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे के काम के लिए अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह पर आयोग की कार्यवाही में सहयोग नहीं करने का इल्जाम लगाया था. विशाल सिंह ने अदालत के सामने कहा था कि अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा ने एक निजी कैमरामैन आर. पी. सिंह को वीडियोग्राफी सर्वे के लिए रखा था जो मीडिया में लगातार गलत बयान दे रहे थे. इसीलिए सिंह को कल आयोग की कार्यवाही से अलग रखा गया था.“
अजय कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की
अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने बताया कि नियमानुसार, जब कोई अधिवक्ता एडवोकेट कमिश्नर के रूप में नियुक्त किया जाता है तब उसकी हैसियत एक लोक सेवक की होती है और उससे यह उम्मीद की जाती है कि वह कमीशन की कार्यवाही पूरी गैर जानिबदारी और ईमानदारी से करेगा जबकि अजय मिश्रा ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन बेहद गैर जिम्मेदाराना तरीके से किया. अदालत ने विशाल सिंह के प्रार्थना पत्र को निस्तारित करते हुए अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश दिए.
निजी कैमरामैन रखने पर पद से हटाया
अदालत ने कहा, “विवेचना से यह स्पष्ट हो चुका है कि अधिवक्ता आयुक्त अजय कुमार मिश्रा द्वारा जो निजी कैमरामैन रखा गया था उसने मीडिया में बराबर बाइट दी जो कि न्यायिक मर्यादा के सर्वाधिक प्रतिकूल है. अदालत ने साथ ही कहा कि विशाल सिंह ही 12 मई के बाद की आयोग की पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट खुद दाखिल करेंगे और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप सिंह, विशाल सिंह के निर्देशन में ही काम करेंगे और स्वतंत्र रूप से कुछ भी नहीं कर सकेंगे.
मुस्लिम पक्ष पहले से अजय मिश्रा पर लगा रहा था भेदभाव का आरोप
अदालत ने सर्वे रिपोर्ट दाखिल करने के लिये दो और दिन का समय दिया है क्योंकि इलाके के नक्शे बनाने में कुछ समय लग रहा है. ऐसे में संभव है कि सर्वे रिपोर्ट 19 मई को अदालत में पेश की जाए. पहले यह रिपोर्ट 17 मई को ही पेश की जानी थी. मुस्लिम पक्ष अधिवक्ता आयुक्त अजय मिश्रा पर पहले से ही पक्षपात का आरोप लगाता रहा है. उसने गत सात मई को सर्वे के दूसरे ही दिन मिश्रा पर आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की अर्जी अदालत में दी थी. हालांकि अदालत ने इसे नामंजूर करते हुए मिश्रा के सहयोग के लिए एक विशेष और एक सहायक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की थी.
सर्वे में अबतक क्या निकला था
गौरतलब है कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे का काम सोमवार को पूरा किया गया था. सर्वे के आख्रि दिन हिन्दू फरीक ने दावा किया था कि मस्जिद के वजूखाने में एक शिवलिंग मिला है. मगर मुस्लिम फरीक ने यह कहते हुए इस दावे को खारिज कर दिया था कि मुगल काल की तमाम मस्जिदों में वजूखाने के ताल में पानी भरने के लिए नीचे एक फौव्वारा लगाया जाता था और जिस पत्थर को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह फौव्वारे का ही एक हिस्सा है.
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