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नई दिल्ली: राजनीतिक प्रोपगैंडा और हथियार को अफसर और शिक्षा विभाग से जुड़े लोग भी जब सच मानकर आदेश- निर्देश जारी करने लगते हैं, तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है, और खुद की फज़ीहत भी उठानी पड़ती है. ऐसा ही हरियाणा के फरीदबाद में शुक्रवार को हुआ जब जिला शिक्षा अधिकारी ने लव जिहाद पर एक नोटिस निकालकर जिले के तमाम स्कूलों को भेज दिया. लेकिन बाद में अपनी गलती का एहसास होने पर नोटिस को वापस ले लिया.
दरअसल, फरीदाबाद के जिले शिक्षा विभाग ने एक सर्कुलर निकाला था, जिसमें बताया गया था कि 'लव जिहाद' की वजह से सामाजिक ताने-बाने को नुक्सान पहुँच रहा है.
स्कूल टाइम के वक़्त लव जिहाद में शामिल होने से सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है. इससे रोकने के लिए सभी सरकारी और निजी स्कूल सभी छात्र-छात्राओं के माता-पिता के मोबाइल नंबर का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाए. स्टूडेंट्स के स्कूल पहुंचने के आधे घंटे बाद सभी छात्रों की हाजिरी लगाई जाए. इसमें गैर हाजिर पाए जाने वाले स्टूडेंट्स की जानकारी उनके अभिभावकों को भेजा जाए. इस नोटिस के मिलने के बाद ही स्कूलों से इसपर प्रतिक्रियाएं आने लगी, और इसका विरोध भी किया गया.
मामला को तूल पकड़ता देखकर, शिक्षा विभाग ने अपनी गलती मान ली. जिला शिक्षा अधिकारी और डाइट की प्रिंसिपल अंशुल सिंगला ने कहा कि उनसे बिना पूछे और बिना दिखाए इसपर उनके दस्तखत लिए गए थे. उन्होंने कहा कि इस नोटिस को रद्द कर दिया गया है. अब नया नोटिस जारी होगा जिससे लव जिहाद शब्द हटा दिया जाएगा. स्कूल में किसने लव जिहाद का शब्द का प्रयोग किया, इसकी जांच होनी चाहिए, क्यूंकि सीएम विंडो पर आई शिकायत के आधार पर ये बताया गया है कि किसी भी स्कूल में लव जिहाद या इस तरह की घटना की कोई शिकायत अभी तक रिपोर्ट नहीं की गई है. ऐसे में ये जांच जरूरी है कि आखिर स्कूलों में भी कौन लव जिहाद का एंगल तलाश कर रहा है.
जब जिला शिक्षा अधिकारी और डाइट की प्रिंसिपल अंशुल सिंगला से पूछा गया कि किसके दबाव में नोटिस वापस लिया गया और लव जिहाद शब्द हटाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि मैं किसी से डरती नहीं हूँ. अंशुल सिंगला के बयान से इस बात की आशंका है कि उन्होंने जानबूझकर लव जिहाद के नाम पर नोटिस निकाला होगा, लेकिन दबाव के बाद अपने फैसले से पलट गईं.
गौरतलब है कि भारत में 'लव जिहाद' भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों द्वार गढ़ा गया एक कागज़ी शब्द है, जिसका मकसद इसका भय दिखाकर चुनावों के समय वोटों का ध्रुविकरण करना होता है. अगर ऐसे कुछ मामले सामने आते भी हैं, तो वो सिर्फ एक आपराधिक घटनाएं होती है. इस सन्दर्भ में साल 2016 में तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह संसद में बयान भी दे चुके हैं कि देश में लव जिहाद जैसी कोई साजिश या संगठित अपराध के कोई सबूत नहीं है. ऐसा वो इस विषय पर गठित NIA की जांच रिपोर्ट के आधार पर संसद में बयान दे चुके हैं. इसके बावजूद लव जिहाद के नाम पर दो समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश लगातार जारी है, और इसमें पुलिस और अफसरान भी सहयोग दे रहे हैं.
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