)
Harlakhi Assembly Election 2025: बिहार के मधुबनी जिले का हरलाखी विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है. यह नेपाल की सीमा से सटा यह इलाका न सिर्फ मिथिला की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है, बल्कि यहां की राजनीति में जातीय और धार्मिक समीकरण भी अहम भूमिका निभाते हैं. हरलाखी विधानसभा पूरी तरह ग्रामीण है और यहां अब तक कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी, आरजेडी, जेडीयू और आरएलएसपी जैसी पार्टियां अपनी पकड़ बनाने की कोशिश करती रही हैं.
हरलाखी विधानसभा में तीन लाख वोटर्स हैं. इनमें मुस्लिम वोटर्स करीब 41,300 हैं, जो कुल वोटरों का 14 फीसद से ज्यादा हिस्सा रखते हैं. यह संख्या इतनी है कि किसी भी इलेक्शन में मुस्लिम वोटों का झुकाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है. दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम वोट यहां बिखरे हुए नहीं हैं बल्कि कई पंचायतों और इलाकों में एकसाथ संगठित रूप में पाए जाते हैं.
मुस्लिम वोटरों का झुकाव लंबे वक्त तक कांग्रेस और सीपीआई की तरफ रहा. 1950 और 1960 के दशक में वामपंथी राजनीति की मजबूती के पीछे अल्पसंख्यक समुदाय का बड़ा समर्थन माना जाता था. हालांकि 1990 के बाद जब लालू प्रसाद यादव का उभार हुआ तो मुस्लिम वोट बैंक आरजेडी की ओर खिसक गया. हरलाखी में भी इसका असर देखा गया और मुसलमानों ने आरजेडी को मजबूती दी.
साल 2015 में बना नया समीकरण
2015 में हरलाखी सीट पर आरएलएसपी के बसंत कुमार कुशवाहा विजयी हुए, लेकिन उनके निधन के बाद उपचुनाव में उनके बेटे सुधांशु शेखर मैदान में आए और जीत हासिल की. धीरे-धीरे मुस्लिम वोटरों का एक हिस्सा जेडीयू की तरफ शिफ्ट हुआ, खासकर तब जब जेडीयू-राजद गठबंधन टूटकर एनडीए और महागठबंधन में नए समीकरण बने. मुस्लिम वोटरों में यह दुविधा हमेशा रही कि उन्हें किस पार्टी का समर्थन करना चाहिए. आरजेडी, जो लंबे समय से उनका “पारंपरिक ठिकाना” रहा है, या फिर जेडीयू, जो सत्ता में रहते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का दावा करता है.
2020 और 2024 का रुझान
2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के सुधांशु शेखर ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की. उन्होंने सीपीआई के उम्मीदवार को मात दी. इस दौरान मुस्लिम वोट बैंक बंटा हुआ दिखा. एक हिस्सा परंपरागत रूप से सीपीआई और आरजेडी के साथ गया, तो दूसरा हिस्सा जेडीयू को वोट करता दिखा. यही विभाजन विपक्षी पार्टियों को हरलाखी में मजबूत स्थिति बनाने से रोकता रहा है. 2024 के लोकसभा इलेक्शन में बीजेपी उम्मीदवार अशोक कुमार यादव ने हरलाखी विधानसभा क्षेत्र में करीब 41 हजार वोटों की बढ़त बनाई. यह इस बात का संकेत है कि मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण पूरी तरह विपक्ष के पक्ष में नहीं हुआ. बल्कि, एनडीए ने बहुसंख्यक वोटों के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के कुछ हिस्से में भी सेंधमारी की.
बीजेपी को कैसे मिल जाती है बढ़त
हरलाखी के मुस्लिम वोटरों को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाते हैं. आरजेडी उन्हें अपने पारंपरिक समर्थक के रूप में देखती है और सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाती है. वहीं, जेडीयू सत्ता में रहकर योजनाओं के लाभ और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुशासन छवि को सामने रखकर मुस्लिम समुदाय को साधने की कोशिश करती है. बीजेपी को मुस्लिम वोटरों से बड़ी उम्मीदें नहीं रहतीं, लेकिन एनडीए गठबंधन के हिस्से के रूप में भाजपा ने हरलाखी में अच्छा प्रदर्शन किया है. यही वजह है कि विपक्ष का वोट बंट जाने पर बीजेपी और जेडीयू को बढ़त मिल जाती है.