Rampur Nawab property: नवाब रजा अली के तीन बेटे और 6 बेटियों के परिवारों को मिलाकर कुल 18 हिस्सेदार हैं. इसमें कांग्रेस की पूर्व सांसद बेगम नूर बानो और पूर्व विधायक काजिम अली भी शामिल हैं.
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रामपुर/सैय्यद आमिर: रामपुर के आखिरी नवाब रजा अली खां की 26 सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति है, जिसके बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई 2019 को शरीयत के हिसाब से बंटवारा करने के आदेश दिए थे. बंटवारे की जिम्मेदारी जिला जज को सौंपी गई है. इस पर पक्षकारों से आपत्ति भी मांगी गई थी.
इस बीच शत्रु संपत्ति अभिरक्षक की ओर से एडीजीसी द्वारा प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया. जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान की नागरिक रहीं मेहरुन्निशा के हिस्से में आने वाली जमीन कस्टोडियन की है, यह संपत्ति उन्हें दी जाए.
अब इस मामले में पूर्व मंत्री नवेद मिया द्वारा एक पुरानी पानी की टंकी तोडने के मामले पर भी कोर्ट में नवाब सम्पत्ति मानकर आपत्ति लगाई गई है जिसपर आज बहस होना है. साथ भी कस्टोडियन कि सम्पत्ति ओर कृषि भूमि के मामलो पर भी स्टेट की तरफ की आपत्ति लगाई गई है. इसपर भी सुनवाई होना है.
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कितने लोगों में बंटेगी ये संपत्ति?
नवाब रजा अली के तीन बेटे और 6 बेटियों के परिवारों को मिलाकर कुल 18 हिस्सेदार हैं. इसमें कांग्रेस की पूर्व सांसद बेगम नूर बानो और पूर्व विधायक काजिम अली भी शामिल हैं.
48 साल तक अदालतों में चलता रहा मामला
रामपुर के शाही परिवार के दरमियान संपत्ति विवाद का मामला 1972 में सिविल कोर्ट में गया. वहां परिवार अदालतों के चक्कर ही काटता रहा और इस बीच मुर्तजा अली के बड़े बेटे मुराद मियां काबिज हो गए. 23 साल तक भी कोई फैसला नहीं आने के बाद 1995 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामला सिविल कोर्ट से अपने यहां ट्रांसफर कर लिया. 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुर्तजा अली के पक्ष में फैसला दिया और सारी संपत्ति का मालिकाना हक मुर्तजा अली और उसके परिवार को ही दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने संपत्ती को शरीया कानून के तकसीम का फैसला दिया है
बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. वहां 17 साल तक चक्कर काटने के बाद 31 जुलाई 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, संपत्तियों का बंटवारा शाही परिवार के गद्दी कानून के तहत नहीं, बल्कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नियमों के मुताबिक होगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने शाही परिवार की संपत्तियों का वैल्यूएशन करने का आदेश दिया. इसके लिए 31 दिसंबर 2020 तक का समय भी तय कर दिया.
कहां से शुरू हुआ विवाद
काबिले ज़िक्र है कि 1966 में रजा अली की मौत हो गई थी. उनकी तीन पत्नियां थी, तीन बेटे और 6 बेटियां थीं. गद्दी कानून के तहत उनके सबसे बड़े बेटे मुर्तजा अली उनके उत्तराधिकारी बने. साथ ही उनके पिता की सारी निजी संपत्ति का मालिकाना हक भी मुर्तजा अली को मिल गया. लेकिन, 1972 में उनके भाइयों ने इसे सिविल कोर्ट में चुनौती दी और इस मामलों को अब 50 साल होने जा रहा है और अब ये मामला हल होने के करीब पहुंच चुका है.
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