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Haldwani Violence: 22 आरोपियों को मिलेगी राहत या जाएंगे जेल? UK HC ने फैसला रखा सुरक्षित

हल्द्वानी हिंसा मामला में अब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने  22 मुल्जिमों की डिफॉल्ट जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी की है. जमीयत उलमा-ए-हिंद की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ट अधिवक्ता नीता रामा कृष्णन ने बहस की थी. उन्होंने पहले मिले 50 मुल्जिमों की जमानत का हवाला देकर याचिका पर मंजूरी ली हैं. 

Haldwani Violence: 22 आरोपियों को मिलेगी राहत या जाएंगे जेल? UK HC ने फैसला रखा सुरक्षित

उत्तराखंड हाईकोर्ट में 10 मार्च को हल्द्वानी हिंसा मामले के 22 मुल्जिमों की डिफॉल्ट जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें मुल्जिमों की तरफ से सीनियर वकील नित्या रामकृष्णन ने हाईकोर्ट को बताया, "इससे पहले कोर्ट ने 50 आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत को मंजूरी दी गई थी. आज कोर्ट में 22 आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत की पिटीशन वाला मामला भी उन्हीं 50 आरोपियों के समान हैं. जैसे पहले जमानत पर आरोपियों को रिहा किया गया था, उसी तरह इन आरोपियों को भी रिहा किया जाना चाहिए."

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने की मुकदमें की पैरवी 
इन अरोपियों के मुकदमों की पैरवी जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के निर्देश पर की जा रही हैं. ये सभी आरोपी फरवरी 2024 से जेल में बंद हैं, जबकि हल्द्वानी सेशन कोर्ट ने उनकी डिफॉल्ट जमानत याचिकाएँ 3 जुलाई 2024 को खारिज कर दी थीं. सुनवाई में नित्या रामकृष्णन के बात सुनने के बाद उत्तराखंड हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के जज पंकज प्रोहत और जज मनोज कुमार तिवारी ने सरकारी वकील से पूछा, "क्या इन आरोपियों का मामला भी उन्हीं आरोपियों जैसा है जिन्हें पहले जमानत दी जा चुकी हैं, जिसपर वकील ने बताया कि  इन मामलों में मामूली अंतर हैं. हाई कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि वे पहले वाले आरोपियों और अभी जमानत की याचिका दाखिल करने वाले आरोपियों के मामलों में क्या अंतर है, इसे स्पष्ट करें. 

कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
सीनियर वकील नित्या रामकृष्णन के अनुरोध पर कोर्ट ने 22 आरोपियों द्वारा दायर डिफॉल्ट जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया. सुनवाई के दौरान नित्या रामकृष्णन ने यह भी बताया, "जांच एजेंसी ने गिरफ्तारी के 90 दिनों के बाद आरोपियों के खिलाफ यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम का कानून) का प्रवर्तन कर दिया ताकि आरोपियों को जमानत ना मिल सकें और जांच के लिए अधिक समय मिल सकें. उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने हल्द्वानी हिंसा मामले से संबंधित जमानत याचिकाओं की जल्द सुनवाई के लिए एक विशेष पीठ का गठन किया है, ताकि इन याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई की जा सके. 

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जमीयत उलमा-ए-हिंद की पैरवी पर जमानत 
हाई कोर्ट ने जिन आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा है. उनके नाम जावेद कुरैशी,मोहम्मद समीर चांद,अयाज़ अहमद,भोला सुहैल, समीर पाशा,शुईब,शाहनवाज शानो, फैज़ान, रईस अहमद अंसारी,अब्दुल माजिद,मोहम्मद नईम,साजिद,सगीर अहमद, इसरार अली,शानो राजा,रईस बट्टू,महमूब माकू,शाहनवाज, जुनैद मोहम्मद शुईब शीबू, मोहम्मद अयान मलिक,मोहम्मद अनस है. इससे पहले भी जमीयत उलमा-ए-हिंद की कानूनी सहायता समिति की पैरवी के वजह से उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 50 आरोपियों (जिनमें 6 महिलाएं भी शामिल थीं) की डिफॉल्ट जमानत याचिकाएँ मंजूर की थीं.

क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर के मुस्लिम बहुल इलाके में 8 फरवरी 2024 को हिंसा हुई थी, जिसमें कई लोगों के खिलाफ इलाके में शांति भंग करने के इल्जाम में मुकदमा दर्ज किया गया था और 100 से ज्यादा मर्द और कई औरतों को गिरफ्तार किया गया था. इन सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया था, हालांकि कई आरोपियों को जेल से रिहा कर दिया गया है.

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