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Chaos on Christmas: भारत में अल्पसंख्यक समुदाय जैसे मुस्लिम और ईसाई पर उनके धार्मिक पहचान के आधार पर हमले तेज हो गए हैं. ईसाई समुदाय की सबसे महत्वपूर्ण त्योहार (क्रिसमस) के आयोजन को लेकर भारत के कई राज्यों में हिंदूवादी संगठनों द्वारा बवाल किया गया और ईसाई समुदाय के सदस्यों से बदतमीजी की गई. इन घटनाओं को लेकर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) ने चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से शांति, सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए समय रहते उचित कदम उठाने की अपील की है.
जमात ए इस्लामी (JIH) के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने क्रिसमस से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाई समुदाय से जुड़े कथित घटनाक्रमों पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने प्रशासन से उचित कदम उठाने की अपील की है, ताकि क्रिसमस का पर्व भयमुक्त और सम्मानजनक माहौल में मनाया जा सके.
सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) को ईसाई समुदाय के कुछ वर्गों पर हमलों, धमकी और परेशान किए जाने की खबरें चिंतित करती हैं. उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इससे डर और अविश्वास का माहौल बन सकता है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान समानता, धर्म की स्वतंत्रता और आपसी सम्मान पर आधारित है. इन मूल्यों को कमजोर करने वाली किसी भी स्थिति पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) ईसाई समुदाय के साथ एकजुटता के साथ खड़ी है.
जमात-ए-इस्लामी हिंदी (JIH) के अध्यक्ष सैयद सदातुल्लाह ने बताया कि कई नागरिक समाज संगठनों ने कुछ क्षेत्रों में प्रार्थना सभाओं में धर्मांतरण विरोधी कानूनों के तहत लगाए गए आरोपों जैसी घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है. इन घटनाओं से कई ईसाई परिवारों में चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है. ऐसे सभी मामलों का समाधान केवल कानून के दायरे में और उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए.
सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि धार्मिक त्योहारों के समय प्रशासन को अतिरिक्त संवेदनशीलता और सतर्कता बरतने की जरूरत होती है. उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि क्रिसमस समारोह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हों और किसी भी तरह के डर या व्यवधान की स्थिति न बने. उन्होंने अपील की कि कानून का इस्तेमाल बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए.
सैयद सादातुल्लाह हुसैनी ने भारत की ताकत याद दिलाते हुए कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और समावेशी चरित्र में है. जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का मानना है कि हर धार्मिक समुदाय के अधिकारों और गरिमा की रक्षा राष्ट्रीय एकता के लिए जरूरी है. उन्होंने प्रशासन और नागरिकों से मिलकर शांति, आपसी सम्मान, और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की अपील की.