Hindenberg Reseach Adani: हिंडनबर्ग रिसर्च और अडानी ग्रुप का नाम खबरों में बना हुआ है. जानिए आखिर मामला क्या है और क्या है हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी.
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Hindenberg Reseach: अडानी ग्रुप इस वक्त मुश्किलों में फंसा हुआ है. हर गुजरते घंटे के हिसाब से कंपनी के घाटे में इज़ाफा होने का दावा किया जा रहा है. एशिया के सबसे अमीर इंसान अडानी को यह घाटा इसलिए हो रहा है क्योंकि अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने अडानी समूह को लेकर बड़े खुलासे किए हैं. हिंडनबर्ग ने अडानी ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग, स्टॉक मेन्युपुलेशन, अकाउंटिंग फ्रॉड, घोटाला, टेक्सपेयर फंड की चोरी जैसे संगीन आरोप लगाए हैं. ये रिपोर्ट आने के कुछ दिन बाद से ही अडानी ग्रुप को दिन-ब-दिन नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि आखिर ये हिंडनबर्ग है क्या? जिसकी वजह से एशिया के सबसे अमीर इंसान का पूरा साम्राज्य हिल गया.
हिंडनबर्ग रिसर्च नाम की कंपनी फाइनेंशियल रिसर्च करती है. इस कंपनी की उम्र बहुत कम है. साल 2017 में नेथन एंडर्सन नाम के व्यक्ति ने यह कंपनी बनाई थी. एंडर्सन एक फाइनेंशियल एनालिस्ट हैं. एक वक्त में नेथन एंडर्स ने इजराइल में एंबुलेंस ड्राइवर का काम भी किया था. इस कंपनी का काम फाइनेंशियल रिसर्च करना होता है. कंपनी का दावा है कि वो ऐसी जगहों पर रिसर्च करते हैं जहां की जानकारियां निकालना आसान नहीं होता. कंपनी की कमाई का ज़रिए शॉर्ट सेलिंग बताया जा रहा है.
आपने अक्सर लोगों को देखा होगा कि लोग किसी कंपनी के शेयर इस उम्मीद से खरीदते हैं कि उस शेयर की कीमत बढ़ेगी और फिर हम बेच देंगे. उसके बाद खरीदी गई कीमत से जितनी ज्यादा कीमत पर बेचा गया वो खरीदार का मुनाफा होता है. जिसे लॉग पोजिशन कहते हैं. लेकिन शॉर्ट सेलिंग इसके बिल्कुल उलट है. शॉर्ट सेलिंग में किसी शेयर को तब खरीदा जाता है जब उस शेयर की कीमत गिरने की उम्मीद है. शेयर की कीमत गिरने पर खरीदार को फायदा होता है.
शॉर्ट सेलिंग इसलिए रिस्की है क्योंकि लॉग पोजिशन में आपको अगर नुकसान होता है तो सिर्फ उतना पैसा डूबेगा जितना आपने शेयर पर लगाया हुआ है. लेकिन शॉर्ट सेलिंग में ऐसा नहीं है. अगर आपने किसी कंपनी के शेयर गिरने उम्मीद से खरीद लिए हैं लेकिन उस कंपनी के शेयर की कीमत और ज्यादा हो गई तो आपका सिर्फ उतना पैसा नहीं डूबेगा जितना आपने लगाया है, बल्कि कंपनी के शेयर की ग्रोथ के हिसाब से डूबेगा. इसका अंदाजा लगाने के लिए हम आपको समझा रहे हैं कि अगर आप लॉग पोजिशन में 1000 रुपये लगाते हैं तो आपका पैसा डूबा भी तो 1000 रुपये से ज्यादा नहीं डूबेगा. वहीं अगर शॉर्ट सेलिंग में आपने 1000 रुपये लगाए हैं और उस कंपनी का शेयर गिरने की बजाए ऊपर चला गया तो फिर आपको नुकसान तो होना ही है लेकिन कितना नुकसान होना है इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है, क्योंकि शेयर जितना ऊपर जाएगा उतना ही आपको नुकसान होगा. यही काम हिंडनबर्ग रिसर्च कंपनी करती है. कंपनी का कहना है कि पहले हम रिसर्च करके उस कंपनी के फ्रॉड को एक्सपोज करेंगे और फिर उस कंपनी के शेयर्स पर हम शॉर्ट सेलिंग कर पैसा लगाएंगे.
साल 2017 में बनी इस कंपनी के नाम के पीछे की वजह भी काफी दिलचस्प है. इस कंपनी का नाम साल 1937 में हुई ट्रेजडी से जुड़ा हुआ है. दरअसल एक हिंडनबर्ग नाम का हवाई जहाज होता था. ये हवाई जहाज प्लेन की तरह नहीं होता था, बल्कि ये एक एयरशिप की तरह था. इसी एयरशिप में आग लगने की वजह से 35 लोगों की जान चली गई थी. इस घटना की उस वक्त की तस्वीरें आज भी सोशल मीडिया पर कभी-कभी देखने को मिल जाती हैं. ऐसे में नाम रखने वालों ने शेयर मार्केट में होने वाले डिज़ास्टर्स से इस घटना को जोड़ते हुए कंपनी का नाम हिंडनबर्ग रखा है.
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