)
I Love Muhammad Trends on Social Media: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक शख्स ने 'I love Muhammad' सोशल मीडिया पोस्ट किया और पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दिया. यह मामला इतना ट्रेंड हो गया है कि आज कल हर शख्स सोशल मीडिया पर 'I love Muhammad' के पोस्टर बनाकर अपना प्रोफाइल फोटो लगा रहे हैं और यूपी पुलिस पर तंज कर रहे हैं. सोशल मीडिया यूजर्स यूपी पुलिस को चुनौती दे रहे हैं और पूछ रहे हैं कि पुलिस मुसलमानों की मॉब लिंचिंग और मस्जिदों और मजारों पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ मामला क्यों नहीं दर्ज करती है.
दरअसल, फतेहपुर के अबूनगर इलाके में नवाब अब्दुल समद के मकबरे को लेकर हिंदू संगठन ने खूब बवाल काटा था और इस मजार को मंदिर बताते हुए मजार के भीतर जमकर तोड़फोड़ की थी और मजार के ऊपर भगवा झंडा फहरा दिया था. इस मामले में पुलिस ने 150 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, लेकिन ज्यादातर अपराधी पुलिस के पकड़ से बाहर हैं. इसी घटना को उदाहरण बनाकर सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि जब मुसलमान कुछ करते हैं तो फौरन कार्रवाई होती है, लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई धीमी क्यों रहती है?
लोग सरकार की मंशा पर उठा रहे हैं सवाल
वहीं, सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया है कि देश में मुसलमानों के खिलाफ अपराध की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं, लेकिन अपराधी अक्सर कानून की पहुंच से बाहर रहते हैं. इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि मुसलमान होना ही जैसे अपराध बन गया है. एक सोशल मीडिया यूजर्स ने 'I love Muhammad' ट्रेंड पर लिखा, सरकार से सवाल है कि जब अल्पसंख्यकों पर हमला होता है तो कार्रवाई इतनी धीमी क्यों होती है? दोषियों को सजा दिलाने और सभी नागरिकों को समान सुरक्षा देने के लिए ठोस और निष्पक्ष कदम कब उठाए जाएंगे.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, कानपुर में मिलाद-उन-नबी के मौके पर मुस्लिम समुदाय ने सड़क किनारे 'I Love Muhammad' लिखे बोर्ड और तम्बू लगाए. स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध किया तो पुलिस ने बोर्ड और तम्बू हटवाकर करीब 25 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया. आरोप है कि बिना अनुमति नई परंपरा शुरू कर सामुदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई. सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इस पोस्ट पर केस हुआ, मगर मजार तोड़ने या मॉब लिंचिंग पर पुलिस इतनी तत्पर क्यों नहीं होती.