इमरान प्रतापगढ़ी ने शायराना अंदाज़ में शाहीन बाग़ मुज़ाहिरीन को पेश किया सलाम

इमरान प्रतापगढ़ी ने शाहीन बाग़ के मुज़ाहिरीन को सलाम किया.यूपी के मुरादाबाद में शाहीनबाग मुज़ाहिरे को याद करते हुए इमारन प्रतापगढ़ी काफ़ी पुर्जोश नज़र आए

इमरान प्रतापगढ़ी ने शायराना अंदाज़ में शाहीन बाग़ मुज़ाहिरीन को पेश किया सलाम

मुरादाबाद: बात जुनूबी हिन्द की हो या शुमाल-मशरिक और मग़रिबी हिन्द की, बग़ैर शाहीन बाग़ के मुकम्मल ही नहीं होती. इसी को लेकर एक एहतेजाज यूपी के मुरादाबाद में हुआ जहां मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने शाहीन बाग़ के मुज़ाहिरीन को सलाम किया.यूपी के मुरादाबाद में शाहीनबाग मुज़ाहिरे को याद करते हुए इमारन प्रतापगढ़ी काफ़ी पुर्जोश नज़र आए. लाखों की भीड़ का दावा करने वाले एहतेजाजियों ने इसे अपने वजूद की लड़ाई बताया तो कांग्रेस के साबिक़ उम्मीदवार रहे इमरान ने तकरीब की ताखीर के लिए पीतलनगरी से शिकायत भी की.

इस मौके पर इमरान प्रतापगढ़ी ने दिल्ली के जामिया नगर इलाके के गोली बाजों को भी याद किया. एक के बाद एक तीन फायरिंग पर एक उम्र दराज ख़ातून के जज्बात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कहने को तो गोली चलाने वाला नाबालिग़ था, उस दिन मैं शाहीन बाग़ में था, जब चैनल वालों ने एक दादी से पूछा कि दादी कोई आया है कट्टा लेकर मारने आप क्या करेंगी? तो उन्होंने कहा कि उससे कह दो कि आए मेरा सीना खुला है, गोली मार दे.

इसके अलावा इमरान लाख़ कोशिशों के बाद भी पार्लियामानी इंतेख़ाबात में अपनी हार का दर्द नहीं भूल पाए लेकिन इसे भी उन्होंने CAA मुख़ालिफ़त की आवाज़ से जोड़ कर जामिया तलबा के साथ ज्यादती का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे मेरी हार पर अब तक मलाल नहीं हुआ था लेकिन उस दिन मलाल हुआ जब जामिया के बच्चों पर लाठियां बरसीं और मैं रात दस बजे से सुबह के साढ़े तीन बजे तक दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के सामने खड़ा होकर नारे बाज़ी करता रहा, उस दिन मुझे मलाल हुआ कि मेरी आवाज़ मज़बूत होती तो आज मैं यह नारा पार्लियामेंट मे लगा रहा होता.

इमरान मौका, दस्तूर और अपने हक़ में माहौल देख कर जीते नुमाईन्दों पर तंज कसना भी नहीं भूले. हालांकि इस बात के लिए इमरान ने शायराना अन्दाज़ का सहारा लेते हुए कहा कि :

हमने सहराओं में हासिल किए आसानी से
तुम समंदर में भी रह कर ना मिले पानी से
ये सियासत के दिये सबके हवाले ना करो 
ये तो बुझ जाते हैं बुज़दिल की निगहबानी से

बात मुरादाबाद की हो या कहीं और की, मुल्क की निगाहें दिल्ली इंतेख़ाबात के बाद शाहीन बाग पर मरकूज़ है. अदालतों में जारी समाअत के बीच मरकज़ की पुलिस क्या हिकमते अमली इख्तियार करेगी. क्योंकि तकरीबन दो महीने से जारी मुज़ाहिरे को मोदी हुकूमत ग़ैर आईनी बता रही है तो मुज़ाहिरीन इसे अपने मुस्तकबिल से जोड़कर देख रहे हैं.