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अवामी लीग पर बैन लगाने के बाद यूनुस सरकार पर भड़के शेख हसीना के समर्थक, UN में काटा बवाल

Bangladesh News: बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद बांग्लादेश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में उसके समर्थकों ने UN मुख्यालय के बाहर प्रोटेस्ट किया है. 

अवामी लीग पर बैन लगाने के बाद यूनुस सरकार पर भड़के शेख हसीना के समर्थक, UN में काटा बवाल

Bangladesh News: बांग्लादेश की अपदस्थ पीएम शेख हसीना के तख्तापलट के बाद यूनुस सरकार उनसे जुड़े लोगों से चुन-चुन कर बदला ले रही है. इसी कड़ी में बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसके बाद बांग्लादेश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है. वहीं, अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में उसके समर्थकों ने UN मुख्यालय के बाहर प्रोटेस्ट किया है. उन्होंने मांग की कि संयुक्त राष्ट्र यह सुनिश्चित करे कि देश में लोकतंत्र फिर से कायम हो.

यूएसए अवामी लीग के अध्यक्ष सिद्दीक रहमान ने कहा, "मोहम्मद यूनुस की गैरकानूनी सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यह एक कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई पार्टी है. अगर चुनाव संयुक्त राष्ट्र की मंशा के मुताबिक सभी को साथ लेकर कराए जाने हैं, तो अवामी लीग से प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए और उसे चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति मिलनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतंत्र बहाल हो. रहमान ने कहा कि भले ही यूनुस को नोबेल पुरस्कार मिला हो, लेकिन अब वह एक तानाशाह बन गए हैं. वह बिना चुनाव के सरकार चला रहे हैं और उन्होंने एक चुनी हुई वैध सरकार को हटा दिया है.

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अमेरिका में बवाल
विरोध प्रदर्शन में बोलने वालों ने कहा कि अमेरिका को बांग्लादेश में लोकतंत्र फिर से बहाल करने की मांग करनी चाहिए. यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था. पिछले सप्ताह बांग्लादेश चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण रद्द कर दिया, जिससे वह चुनाव में भाग लेने के लिए अयोग्य हो गई.
बांग्लादेश ने इलेक्शन की तारीख तय नहीं की है.

UN में सौंपी चिट्ठी
विरोध प्रदर्शन के आयोजक प्रदीप कर ने कहा कि उन्होंने अपनी मांगों के साथ संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र सौंपा है. उन्होंने कहा कि शेख हसीना 'वैध प्रधानमंत्री हैं', जबकि यूनुस ने "जमात-ए-इस्लामी और आतंकवादियों" की मदद से सत्ता हासिल की है.

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