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अब्बास मेहदी रिज़वी: चीन की चाल, चालाकी और चतुराई के अब चारो खाने चित होने का वक़्त आ गया है. एलएसी पर तो उसे अपनी हैसियत का अंदाज़ा हो ही चुका है. अब समन्दर में भी उसकी दादागीरी को बाहर का रास्ता दिखाने की पूरी तैय्यारी है. 'क्वाडिलैटरल सिक्योरिटी डायलॉग' यानी क्वाड के ज़रिए चीन को हद में रहने का सबक़ देने की क्लास का वक़्त तय हो चुका है. क्वाड को मिनी नाटो भी कहा जा रहा है. क्वाड चार मुल्क की मिलिट्री तंज़ीम है जो इंडो-पैसिस्फिक' इलाक़े के जम्हूरी मुल्कों में हिफ़ाज़त और मफ़ादात के लिए पुरअज़्म हैं. इसी साल छह अक्टूबर को जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड की जो बैठक आयोजित की गई वो कई तरह से अहमियत रखती है
हिंदुस्तान डिप्लोमैटिक सतह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है
हिंदुस्तान डिप्लोमैटिक सतह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. लगभग 13 सालों के बाद क्वाड मुल्कों के मुशतरका मश्क में हिंदुस्तान, अमरीका और जापान की फ़ौज के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया की फ़ौज भी शामिल हो रही है. ये मश्क़ अगले महीने, यानी नवम्बर में बंगाल की खाड़ी और बहरे अरब में किया जाएगा. इसे रस्मी तौर पर 'मालाबार एक्सरसाइज़' का नाम दिया गया है. सोचिए जब मालाबार ड्रिल में चारों के वॉर शिप दहाड़ेंगे तो उस दहाड़ से ड्रैगन का क्या हाल होगा. ऑस्ट्रेलिया की बात की जाए तो वो ख़ुद को साल 2007 में ही इस मुशतरका फ़ौजी मश्क़ से अलग कर चुका था. लेकिन इसके फिर से इस फ़ौजी मश्क़ में शामिल होने की वजह से क्वाड मुल्कों की ये तंज़ीम और मज़बूत होगी. 'मालाबार एक्सरसाइज़' सिर्फ़ एक प्रैक्टिस ही नहीं है बल्कि इसके ज़रिए चारों मुल्क यानी हिंदुस्तान, अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया एक सख़्त पैग़ाम देना चाहते हैं.
क्वाड के इरादों से साफ़ है कि चीन अगर ज़रा भी एलएसी पर गुस्ताख़ी करता है तो उसको माक़ूल सबक़ दिखाने की पूरी तैय्यारी ह
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