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भारत के यूनिवर्सिटीज़ न रखे इन 3 मुस्लिम देशों से कोई ताल्लुक, AIU की मांग

India Pakistan Academic Relations: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने सभी भारतीय विश्वविद्यालयों से पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के साथ अकादमिक सहयोग खत्म करने की अपील की है.

भारत के यूनिवर्सिटीज़ न रखे इन 3 मुस्लिम देशों से कोई ताल्लुक, AIU की मांग

India Pakistan Academic Relations: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने 22 अप्रैल को सभी सभी भारतीय विश्वविद्यालयों से पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग रद्द करने की गुजारिश की है.  चिट्ठी लिखकर, AIU ने पूरे भारत के कुलपतियों से इन तीन देशों के संस्थानों के साथ सभी समझौता ज्ञापन (MoU) समाप्त करने के लिए कहा.

AIU ने इस कदम के लिए बांग्लादेश और तुर्की द्वारा पाकिस्तान को दिए गए समर्थन का हवाला दिया. शुक्रवार को एएनआई से बात करते हुए, एआईयू के महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने कहा, "हमारे सशस्त्र बल सीमाओं पर लड़ रहे हैं. हमें शिक्षाविदों को विश्वविद्यालयों में भी लड़ने की जरूरत है. बांग्लादेश और तुर्की जैसे कुछ देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया है. इसलिए हमने 15 मई को सभी विश्वविद्यालयों को एक पत्र लिखा और उनसे बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ अपने सभी एमओयू रद्द करने की अपील की."

दुश्मन देशों के साथ संबंध रखना ठीक नहीं- AIU चीफ
उन्होंने आगे कहा कि दुश्मन देशों के साथ शैक्षणिक संबंध रखने का कोई मतलब नहीं है. कई विश्वविद्यालयों ने अपने एमओयू रद्द कर दिए हैं. हमें लगा कि हमें उस जगह पर एक प्रवेश के लिए लड़ना चाहिए जहां हम रहते हैं, यानी विश्वविद्यालयों में. कई विश्वविद्यालयों ने एआईयू के अनुरोध पर पहले ही कार्रवाई की है. कानपुर विश्वविद्यालय, जेएनयू, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय, एलपीयू, जामिया मिलिया इस्लामिया, एमएएनयूयू हैदराबाद, आईआईटी रुड़की और आईआईटी बॉम्बे, उनमें से कई ने पहले ही अपने एमओयू रद्द कर दिए हैं या ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं.

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डॉक्टर पंकज मित्तल ने की ये अपील
डॉक्टर पंकज मित्तल ने कहा, "देश भर में लगभग 1,082 विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाली एआईयू यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी पहुंच जारी रखेगी कि भारतीय छात्र शत्रुतापूर्ण इरादों वाले देशों से प्रभावित न हों. हमारी अपील है कि हमारे दुश्मन देश जो भी हों, जो भी देश हैं जिनके साथ हमारी दुश्मनी है. हमें उनके साथ सद्भाव न रखने के लिए समझौता ज्ञापन नहीं करने हैं. हमें उन लोगों के साथ काम करना है जहां हमारे बच्चे जाते हैं और अच्छी चीजें सीखते हैं और देश के लिए कुछ करते हैं."

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