Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam2742995
Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंभारत-पाक के बीच युद्ध हुआ तो किसका साथ देंगे मुस्लिम देश? जानिए सऊदी अरब का स्टैंड

भारत-पाक के बीच युद्ध हुआ तो किसका साथ देंगे मुस्लिम देश? जानिए सऊदी अरब का स्टैंड

India Pakistan Tension 2025: पहलगाम हमले की निंदा दुनियाभर में हो रही है और पाकिस्तान की भी आलोचना हो रही है. इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कई कड़े और बड़े फैसले लिए, जिससे पाकिस्तान परेशान और अलग-थलग पड़ गया है और तमाम मुस्लिम देशों से मदद की गुहार लगा रहा है.

भारत-पाक के बीच युद्ध हुआ तो किसका साथ देंगे मुस्लिम देश? जानिए सऊदी अरब का स्टैंड

India Pakistan Tension 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव नए मकाम पर पहुंच गया है. इस हमले की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है और पाकिस्तान की भी आलोचना हो रही है. इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कई कड़े और बड़े फैसले लिए, जिससे पाकिस्तान परेशान और अलग-थलग पड़ गया है और तमाम मुस्लिम देशों से मदद की गुहार लगा रहा है, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान को जो पहले ताकतवर मुस्लिम देशों का समर्थन मिलता था, अब उसे वो समर्थन नहीं मिल रहा है.  

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मुस्लिम देश पाकिस्तान के साथ धार्मिक एकजुटता दिखाने के बजाय अपने भू-राजनीतिक और आर्थिक लाभों को प्राथमिकता दे रहे हैं. वहीं, ईरान और तुर्की कूटनीतिक एकजुटता की ओर बढ़ रहे हैं. जबकि खाड़ी देश आर्थिक और क्षेत्रीय स्थिरता को महत्व दे रहे हैं. ईरान ने तनाव कम करने के लिए पहले ही मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है और पाकिस्तान का समर्थन करने के बजाय खुद को तटस्थ पक्ष के रूप में पेश किया है.

सऊदी अरब क्यों है मौन
जराए के मुताबिक, अब ज्यादातर इस्लामिक देश पाकिस्तान का बिना शर्त साथ देने से बच रहे हैं. इसकी वजह ये है कि भारत उनके लिए एक बड़ा और अहम कारोबारी पार्टनर है. सऊदी अरब ने पहलगाम हमले पर कोई सख्त बयान नहीं दिया है. सऊदी अरब इस मुद्दे को भारत और पाकिस्तान का आपसी मामला मानता है. सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब किसी भी झगड़े में पड़ना नहीं चाहता, क्योंकि वो अपनी अर्थव्यवस्था मज़बूत करने में जुटा है. सऊदी की ‘विजन 2030’ योजना के तहत भारत उसकी अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा रहा है.

Add Zee News as a Preferred Source

कतर ने साधी चुप्पी
वहीं, कतर ने भी इस मामले में चुप्पी साधी है. उसकी विदेश नीति का ध्यान आर्थिक मज़बूती और किसी भी झगड़े से दूर रहने पर है. कतर भी धार्मिक भावना से ज़्यादा अपने आर्थिक फायदों को अहमियत दे रहा है. यानी साफ है. अब इस्लामिक देश भी पहले की तरह पाकिस्तान का खुला समर्थन नहीं कर रहे. उनका ध्यान अब अपनी कमाई और भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने पर है.

UAE ने पाकिस्तान का खुलकर क्यों नहीं किया समर्थन
UAE ने भले ही भारत की सिंधु जल संधि (पानी बंटवारे के समझौते) को रोकने की आलोचना की है, लेकिन उसने पाकिस्तान का खुला समर्थन नहीं किया. वजह ये है कि यूएई का भारत के साथ 85 अरब डॉलर का कारोबार है और वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. इसी वजह से यूएई बीच का रास्ता पकड़ रहा है ताकि किसी से रिश्ता न बिगड़े.

ईरान क्यों नहीं चाहता है भारत-पाकिस्तान में जंग
ईरान ने भी इस बार पाकिस्तान का साथ देने के बजाय शांति की बात की है. ईरान कह रहा है कि वो दोनों देशों के बीच सुलह करवाने को तैयार है. दरअसल, ईरान भारत के साथ अपने कारोबारी रिश्ते मजबूत रखना चाहता है, खासतौर पर चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को लेकर, जो भारत के लिए बेहद अहम है. इसलिए ईरान खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में नहीं आ रहा. मतलब ये है कि अब ज्यादातर इस्लामिक देश पाकिस्तान का खुला समर्थन करने से बच रहे हैं और अपने-अपने फायदों को ध्यान में रखकर तटस्थ (न्यूट्रल) रहना चाह रहे हैं.

TAGS

Trending news