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जिस चोटी पर थी चीन की टेढ़ी नज़र उस पर भारतीय फौज ने किया कब्ज़ा

दरअसल हिंदुस्तानी फौज ने पैंगोंग झील (Pangong Lake) के जनूबी हिस्से में मौजूद एक अहम चोटी पर कब्ज़ा कर लिया. ये चोटी डिप्लोमिटक तौर पर काफी अहम मानी जाती है.

फाइल फोटो
फाइल फोटो

नई दिल्ली: 29-30 अगस्त की रात लद्दाख के पैंगोंग झील के दक्षिणी (जनूब) में चीन के फौजियों ने कुछ इलाकों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की. चीन के करीब 500 फौजी इस गैरकानूनी कब्जे़ के लिए आए थे. उनके पास रस्सी और चढ़ाई के दूसरे कई औजार भी थे. रात के अंधेरे में ब्लैक टॉप और थाकुंग हाइट्स के बीच टेबल टॉप इलाके पर चीनी फौजियों ने चढ़ाई शुरू की लेकिन हिंदुस्तानी फौज पहले से मुस्तैद थी. हिंदुस्तानी जवानों ने चीनी फौज को पहले रोका और फिर पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया. चीन पैंगोंग के थाकुंग इलाके में टशन से आया था लेकिन हिंदुस्तानी जवानों की हिम्मत देखकर टेंशन में लौट गया. 

दरअसल हिंदुस्तानी फौज ने पैंगोंग झील (Pangong Lake) के जनूबी हिस्से में मौजूद एक अहम चोटी पर कब्ज़ा कर लिया. ये चोटी डिप्लोमिटक तौर पर काफी अहम मानी जाती है. इस चोटी पर चीन की टेढ़ी नज़र बनी हुई थी. हिंदुस्तानी फौज की स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है. 

क्या है स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF)
Special Frontier Force का कयाम 14 नवम्बर 1962 को किया गया. इस फोर्स की खास बात ये है कि इसमें हिन्दुस्तान में रह रहे तिब्बती तबके के जवान भर्ती होते हैं. इसका कयाम खास तौर पर चीन से निपटने के लिए ही किया गया था. ऐसे में जब गलवान वादी में चीन की करतूत के बाद LAC पर टेंशन बढ़ी, तो हिंदुस्तान ने हालात को समझते हुए डिप्लोमेटिक तौर पर पैंगोंग सो इलाके के कुछ अहम पॉइंट्स पर SFF की तैनात कर दिया था. ऐसे में चीन ने 29-30 अगस्त की रात जब चीनी फौजियों इस चोटी घुसपैठ की हिमाकत की तो चुटकी भर में SFF स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स ने चीनी फौजियों को खदेड़ दिया. 

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कई ऑपरेशन दे चुकी है अंजाम
साल 1971 की जंग में चटगांव के पहाड़‍ियों को 'ऑपरेशन ईगल' के तहत महफूज़ करने में SFF का रोल था. उस ऑपरेश में रेजिमेंट के 46 जवान शहीद हुए थे. 1984 में ऑपरेशन ब्‍लूस्‍टार में भी SFF कमांडोज़ शामिल थे जिसमें अमृतसर के स्‍वर्ण मंदिर को खाली कराया गया. सियाचिन की चोटियों पर जब हिंदुस्तान ने 'ऑपरेशन मेघदूत' लॉन्‍च करने का फैसला किया तो भी SFF को याद किया. 1999 में करगिल जंग के दौरान भी SFF 'ऑपरेशन विजय' का हिस्‍सा थी.

सीधे PM को करती है रिपोर्टिंग
बता दें कि फ्रंटियर फोर्स के मूवमेंट की किसी को भनक नहीं होती, मतलब इससे ये समझा जा सकता है कि यह कितनी खुफिया है. SFF डायरेक्टर जनरल ऑफ सिक्योरिटी  के ज़रिए सीधे मुल्क के वज़ीरे आज़म को रिपोर्ट करती है. स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स के कयाम के बाद से कई बड़े ऑपरेशंस को अंजाम दे चुकी है.

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