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Fake Social Media Account Case in India: सोशल मीडिया आज के दौर में इंसानी जिंदगी का सबसे जरुरी हिस्सा बना गया है. इंसानी जिंदगी के रोजमर्रा की जिंदगी में एक लंबा वक्फा अब ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन दुनिया में बीतता है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पहले ट्विटर), लिंक्डइन और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने हमें दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों से जोड़ने का आसान जरिया दिया है, लेकिन यही प्लेटफॉर्म कई बार धोखाधड़ी और साइबर अपराध का अड्डा भी बन जाते हैं. सबसे खतरनाक समस्या है, फर्जी प्रोफाइल (Fake Account) का बनना और उसके जरिए अपराधों को अंजाम देना.
अक्सर देखा गया है कि नकली प्रोफाइल कई गलत इरादों से बनाए जाते हैं. सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल के जरिये यूजर्स को झांसा देकार साइबर ठगी जैसी वारदात को अंजाम दिया जाता है. इस दौरान साइबर ठग किसी के नाम से फर्जी अकाउंट बनाकर बैंकिंग डिटेल्स, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और जिनी जानकारी तक चुराने की कोशिश करते हैं.
कई बार बदले की भावना से भी नकली प्रोफाइल बनाकर सामने वाले को बदनाम किया जाता है. इसमें आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो या मैसेज डालकर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जाता है. कई बार नौजवान महज मजाक के मकसद से सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी अकाउंट बना लेते हैं.
बीते कुछ सालों में एक और ट्रेंड सामने आया है. शातिर लोग किसी दोस्त या रिश्तेदार के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर मैसेज भेजते हैं और अचानक पैसे की मदद मांगते हैं. ऐसे में लोग बिना शक किए मदद कर बैठते हैं और बाद में पता चलता है कि वे ठगी का शिकार हो गए. जब तक उन्हें ठगी होने का एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.
ऑनलाइन धोखाधड़ी या साइबर फ्रॉड का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2023 की पहली छमाही में भारत को साइबर फ्रॉड से हर माह औसतन एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो धीरे-धीरे अब सात हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा है. साइबर फ्रॉड में कई बार वीडियो कॉल या अन्य माध्यम से फर्जी अधिकारी की प्रोफाइल दिखाकर धोखाधड़ी करते हैं और लोगों को जालसाजी का शिकार बनाते हैं.
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल के जरिये हुई कई वारदातों को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने इससे जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. फर्जी प्रोफाइल बनाना और उसका इस्तेमाल करना किसी मजाक या मामूली शरारत की तरह नहीं देखा जाता बल्कि इसे गंभीर अपराध माना गया है. यही वजह है कि भारत सरकार ने कानून में इसके लिए कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है. ऐसे में आइये समझते हैं कि फर्जी प्रोफाइल बनाने वालों के खिलाफ किन धाराओं में आप मामला दर्ज करा सकते हैं
आईटी एक्ट, धारा 66(घ): अगर कोई शख्स कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल कर नकली पहचान बनाकर धोखाधड़ी करता है, तो उसे तीन साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.
आईटी एक्ट, धारा 66(ग): अगर कोई शख्स धोखे या चालाकी से किसी और का पासवर्ड या इलेक्ट्रॉनिक पहचान चिन्ह इस्तेमाल करता है, तो उस पर भी तीन साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है.
इस तरह की वारदातों को अंजाम देने वाले दोषियों को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 319(1) के तहत नकली पहचान से चीटिंग करना अपराध की कैटेगरी में रखा गया है. इस मामले में दोषी पाए जाने पर संबंधित शख्स के खिलाफ तीन साल तक की जेल का प्रावधान है.
धारा 336(3): अगर कोई धोखाधड़ी के मकसद से फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार करता है, तो उसे सात साल तक की सजा हो सकती है.
अगर किसी को अपनी फर्जी प्रोफाइल सोशल मीडिया पर दिखे तो घबराने की बजाय सबसे पहले सबूत इकट्ठा करना जरूरी है. नकली अकाउंट का स्क्रीनशॉट और यूआरएल लिंक सेव करें. इसके बाद अपनी असली प्रोफाइल से चेतावनी जारी करें ताकि आपके परिचित लोग ठगी का शिकार न बनें. यह इस बात की तस्दीक है कि आप इस वारदात में शामिल नहीं है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शिकायत करने का विकल्प मौजूद होता है. संबंधित अकाउंट को रिपोर्ट करने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म के ग्रेवांस ऑफिसर से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर भी मुफ्त में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. यहां शिकायत की स्थिति ट्रैक करने की सुविधा भी मिलती है.
अगर इन सबके बावजूद कार्रवाई नहीं होती तो पीड़ित अपने नजदीकी साइबर सेल या पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है. फर्जी अकाउंट को जल्द से जल्द बैन कराने और लोगों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोग मिलकर फर्जी अकाउंटा की रिपोर्ट करें, क्योंकि कई बार लगातार रिपोर्ट मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंपनी फर्जी अकाउंट को खुद ही हटा देती है.
सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाना अब सिर्फ समय बिताने या मजाक उड़ाने वाली हरकत नहीं रह गई है. यह एक गंभीर साइबर अपराध है, जिसकी कीमत आरोपी को जेल और जुर्माने के रूप में चुकानी पड़ सकती है. यानी साफ है कि अगर कोई फर्जी प्रोफाइल बनाता है तो वह न सिर्फ कानून के शिकंजे में फंस सकता है बल्कि उसकी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों साख पर बुरा असर पड़ता है.दूसरी ओर किसी को अपनी नकली प्रोफाइल दिखे तो चुप बैठने के बजाय तुरंत शिकायत करना ही समझदारी है.
सोशल मीडिया जितना हमारे जीवन का जरूरी हिस्सा बन गया है, उतना ही जरूरी है सतर्क रहना. सोशल मीडिया की रीच ज्यादा होती है, इसलिए अपराधों को अंजाम देने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है. उलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत की कुल आबादी के लगभद 49.4 फीसदी आबादी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है. इस दौरान भारत के लोग मशहूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हर 2.4 घंटे बिताते हैं. इसलिए यूजर्स को सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हुए सावधान रहना चाहिए.