International Women’s Day 2021 : कश्मीर की आरिफा के जज्बे को सलाम, इस काम के लिए मिल चुका है राष्ट्रपति से सम्मान

कश्मीर में एक महिला के उद्यमी बनने का कई लोग विरोध भी कर रहे थे. उनके लिए व्यापार के लिए पैसा जुटाना भी आसान नहीं था. यह ऐसी चुनौतियां थी जिसे पार करना था.

International Women’s Day 2021 : कश्मीर की आरिफा के जज्बे को सलाम, इस काम के लिए मिल चुका है राष्ट्रपति से सम्मान
फाइल फोटो

श्रीनगर: पूरी दुनिया में आज महिला दिवस 2021 (International Womens Day 2021 ) सेलिब्रेट किया जा रहा है. महिला दिवस 2021 पर हम आपको जम्मू-कश्मीर की एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों और तमाम विरोध की परवाह न करते हुए कुछ अलग करने की कोशिश की. कश्मीर में दम तोड़ रहे नमदा हस्तकला को फिर से शिखर पर लाने की ठानी. यह उसी का प्रयास है कि आज कश्मीर में नमदा हस्तकला फिर से नजर आती है और इसकी मांग भी पहले की तरह बरकरार है. 

'गलीचा' को पुनर्जीवित करने में रहा है बड़ा योगदना 
आरिफा जान (Arifa Jan) के इसी जज्बे को सलाम करते हुए 8 मार्च  2020 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) नारी शक्ति पुरस्कार (Nari Shakti Award) से सम्मानित किया. कश्मीर से निकलकर जान ने पारंपरिक कढ़ाईदार गलीचा और प्रसिद्ध हस्तकला नमदा को पुनर्जीवित करने का काम किया है. 33 वर्षीय आरिफा ने कश्मीरी पारंपरिक 'गलीचा' को पुनर्जीवित करने के लिए तीन विनिर्माण इकाइयां स्थापित की हैं. जिन्हें 'नमदा' कहा जाता है. इसके अलावा 25 शिल्प लोगों को रोजगार और घाटी में 100 महिलाओं को प्रशिक्षित किया. 'नमदा' खराब हो गए ऊन से बनाया जाता है. नमदा एक प्रसिद्ध गलीचा है जिसका उपयोग सर्दियों के दौरान किया जाता है. 

कश्मीरी महिलाओं को किया प्रोत्साहित
आरिफा श्रीनगर के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती है. कश्मीर विश्वविद्यालय से कामर्स में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने दो साल का क्राफ्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम किया, लेकिन उनके पास इतने रुपये नहीं थे कि इसे कर पाती. जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उसकी सहायता की. उन्होंने 2012 में श्रीनगर में पुराने शहर के सेकीडाफर इलाके में अपनी पहली व्यावसायिक इकाई शुरू की.  एक दशक से भी कम समय में आरिफा ने कश्मीर में 100 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया और 25 कश्मीरी शिल्प लोगों को रोजगार दिया है. इसके अलावा उनकी मजदूरी 175 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये कर दी. 

मिल चुका है यह सम्मान 
 आरिफा को 2013 में कश्मीर के एक प्रमुख व्यापारिक घराने ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा. इसके अलावा आरिफा को मुंबई में जागृति यात्रा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कश्मीर के प्रसिद्ध शिल्प घर के पुनरुद्धार के लिए भी सम्मानित किया गया. यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट द्वारा एक महिला उद्यमिता कार्यक्रम से लौटने के बाद उन्हें 2014 में अमेरिकी नागरिकता पात्रता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया था. उन्होंने श्रीनगर के नूरबाग और नवा कदल इलाकों में दो अन्य इकाइयों की स्थापना किया था.

काफी कठिन रहा डगर
कश्मीर में एक महिला के उद्यमी बनने का कई लोग विरोध भी कर रहे थे. उनके लिए व्यापार के लिए पैसा जुटाना भी आसान नहीं था. यह ऐसी चुनौतियां थीं जिसे पार करना था. आरिफा का कहना है कि उसने विरोध की परवाह नहीं की. उसका परिवार भी उसके साथ खड़ा रहा. व्यापार के लिए पैसे नहीं थे. बैंक से लोन नहीं लेना चाहती थी. उन्हे किसी तरह से सहायता मिली. इसके बाद उन्होंने बुनकरों को मनाया और कई नए डिजाइन बनाए.

पीएम मोदी कर चुके है सराहना 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ट्विटर हैंडल पर आरिफा ने लिखा था, वह हमेशा से ही कश्मीर के पारंपरिक हस्तकला को फिर से जीवित करने का सपना देखती थी. उनका मानना था कि इसी से महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है. मैंने कश्मीर में महिला बुनकरों की हालत करीब से देखी है और इसके बाद ही मैंने नमदा हस्तकला को फिर से पहले वाला मुकाम दिलाने के लिए काम शुरू किया. मैं अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में जाती थी और बुनकरों के घरों में जाकर उनकी हालत देखती थी. उन्हें उनके काम का सही मेहनताना नहीं मिल पा रहा था इस कारण कश्मीर की हस्तकला खत्म हो रही थी.

उन्होंने आगे बताया मैंने इसके बाद इसके लिए काम करना शुरू किया. उस समय महिलाओं को एक दिन का सिर्फ 50 रुपए मिलते थे, लेकिन उसके बाद मैंने इनके साथ काम शुरू किया और उन्हें दिन का 450 रुपए तक देना शुरू कर दिया. मुझे बाहर भी काम करने का मौका मिला लेकिन मैंने कश्मीर में ही रहना पसंद किया. आज कई वर्षों की मेहनत के बाद फिर से कश्मीर की हस्तकला को पहले जैसा मुकाम मिलने की दिशा में काम हो रहा है.

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