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Iran Nuclear Talks: ईरान ने अगले सप्ताह तीन यूरोपीय देशों जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है. यह फैसला उस समय आया है जब ईरान पर फिर से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लगाए जाने का खतरा मंडरा रहा है. ईरानी मीडिया ने शुक्रवार को बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के अपने समकक्षों से फोन पर बातचीत की. इस बातचीत में तय हुआ कि मंगलवार को इन देशों के उप-मंत्रियों की बैठक होगी.
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वेडफुल ने इस बैठक की तस्दीक करते हुए कहा कि यूरोप तैयार है कि अगर ईरान ने कोई ठोस और स्थायी समझौता नहीं किया तो संयुक्त राष्ट्र के स्नैपबैक मैकेनिज़्म के तहत फिर से सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा, “समय बहुत कम है और ईरान को गंभीरता से शामिल होना होगा.”
वहीं, दूसरी तरफ ईरान ने इन चेतावनियों को खारिज कर दिया. अराघची ने यूरोपीय देशों पर आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे कदम उठाने का न तो कानूनी और न ही नैतिक अधिकार है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूरोप ने प्रतिबंधों की धमकी को अमल में लाया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देश आरोप लगाते हैं कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार बनाने की तैयारी कर रहा है. हालांकि अब तक पश्चिमी देशों ने इस आरोप के पुख्ता सबूत पेश नहीं किए हैं.
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ईरान अभी परमाणु हथियार बनाने से काफी दूर है. मार्च में अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर टुलसी गबार्ड ने भी गवाही दी थी कि ईरान के परमाणु बम बनाने की कोई ठोस जानकारी खुफिया एजेंसियों के पास नहीं है.
हालात कैसे बिगड़े?
ईरान और अमेरिका के बीच जून में वार्ता उस वक्त टूट गई जब वाशिंगटन और इज़रायल ने ईरान की परमाणु साइटों पर हमले किए. ये हमले 12 दिन तक चले. इसके बाद से IAEA के निरीक्षकों को ईरानी परमाणु ठिकानों पर जाने की इजाज़त नहीं दी गई. IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता के लिए निरीक्षण बेहद ज़रूरी हैं. लेकिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने चेतावनी दी थी कि अगर IAEA अपने “दोहरा मापदंड” बंद नहीं करेगा, तो सहयोग की कोई संभावना नहीं है. ईरान का आरोप है कि IAEA ने अमेरिकी और इज़रायली हमलों की निंदा नहीं की और यही उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है.
अब कहां होगी बातचीत
जुलाई में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने एक कानून पर दस्तखत किए जिसके बाद IAEA के साथ सहयोग निलंबित कर दिया गया. ईरान ने साफ कहा कि अब वह इस संस्था पर भरोसा नहीं करता. वहीं, ईरान और यूरोपीय देशों के बीच पिछली बैठक 20 जून को जेनेवा में हुई थी, जब ईरान और इज़रायल के बीच लड़ाई जारी थी. उस बैठक में कोई खास प्रगति नहीं हुई थी. अब ईरानी टीवी का कहना है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को विएना जाएगा और वहां IAEA अधिकारियों से मुलाकात करेगा. हालांकि इस मुलाकात के बारे में अधिक जानकारी साझा नहीं की गई है.