Iran America Nucler deal: ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर बड़ी बात कह दी है. उन्होंने कहा है कि ईरान पर अमेरिकी बैन और बातचीत दोनो एक साथ नहीं हो सकता है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Iran America Nucler deal: ईरान की परमाणु प्रोजेक्ट को लेकर इजरायल, अमेरिका समेत वेस्ट के देश विरोध में रहते है. अमेरिका वक्त वक्त पर ईरान को परमाणु प्रोजेक्ट बंद करने या कम करने के लिए दबाव भी बनाता रहा है. लेकिन ईरान किसी मुल्क की बातों पर ध्यान नहीं देता है. ईरान लगातार अपनी परमाणु ताकतों को बढ़ा रहा है. दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव जितने के बाद ट्रम्प ईरान पर प्रमाणु कार्रयक्रम धिमा करने और बातचीत करने के लिए दबाव बना रहे हैं. खबर है कि ईरान के विदेश मंत्री ने बातचीत करने से मना कर दिया है. उन्होंने कहा कि बातचीत और बैन एक साथ नही चलेगा.
दरअसल, ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान बाहरी दबाव या प्रतिबंधों का सामना करते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत नहीं करेगा. उन्होंने तेहरान में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह घोषणा की है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक अराघची ने मंगलवार 25 फरवरी को कहा कि ईरान तब तक अमेरिका के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा, जब तक वाशिंगटन के तरफ से ईरान पर लागाए गए प्रतिबंधों को समाप्त नहीं कर देता है.
ट्रम्प ने तोड़ा था डील
गौरतलब है कि अमेरिका ने 2015 में ईरान के साथ परमाणु समझौत किया था. इस समझौते को जिसे संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) के नाम से जाना जाता है. इस समझौते को ट्रम्प 2018 में अपनी पहली कार्यकाल के दौरान खत्म कर दिया था. साथ ही ईरान पर और ज्यादा प्रतिबंध लगा दिया था. 2018 से लगे प्रतिबंध के बाद ईरान अपनी परमाणु क्षमता को और तेजे से बढ़ाने लगा.
समझौते के लिए कई सालों से हो रही है कोशिश
अराघची ने कहा, "दबाव, धमकियों और प्रतिबंधों के तहत बातचीत बेकार है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने जेसीपीओए को फिर से जीवित करने के लिए मॉस्को के साथ 'गहन बातचीत' की है. धयान देने वाली बात यह है कि 2018 वाली समझौते को बहाल करने की कोशिशें साल 2021 में शुरू हुई थी लेकिन अभी तक कोई खास सफलता नहीं मिली. उन्होंने आगे कहा कि हम मानते हैं कि बिना किसी धमकी या दबाव के समझौते को फिर से जिंदा करने की कूटनीतिक क्षमता अभी भी मौजूद है." उन्होंने समाधान के लिए मॉस्को का समर्थन देने का वचन दिया और कहा, "यह संकट ईरान द्वारा नहीं पैदा किया गया है.