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नई दिल्लीः दक्षिणी दिल्ली के संगम विहार के लोगों ने दावा किया है कि उन्हें असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य के अंदर एक कब्रिस्तान में प्रवेश करने के लिए 10 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा जा रहा है. इसके बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए वन विभाग के इस फैसले पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है. वन अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन एक सूत्र ने कहा कि अभयारण्य में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने और वन्यजीवों की परेशानी को कम करने के लिए पिछले साल सितंबर में प्रवेश शुल्क लगाया गया था.
प्रवेश शुल्क अभयारण्य के लिए है, न कि कब्रिस्तान के लिए
सूत्र ने कहा, ‘‘प्रवेश शुल्क अभयारण्य के लिए है, न कि कब्रिस्तान के लिए.’’ कब्रिस्तान वन्यजीव अभयारण्य की सीमा के पास संगम विहार इलाके के साथ स्थित है, जो एशिया की सबसे बड़ी अनधिकृत कॉलोनी है. संगम विहार कब्रिस्तान कमेटी के महासचिव दुला खान के मुताबिक, कब्रिस्तान करीब पांच हेक्टेयर में फैला हुआ है और 35 साल से ज्यादा पुराना है. वन भूमि पर होने के बावजूद अधिकारियों ने अतीत में लोगों को प्रवेश करने की अनुमति दी थी. उन्होंने दावा किया, ‘‘यह पहली बार है जब संगम विहार और आसपास के लोगों को कब्रिस्तान में प्रवेश करने के लिए 10 रुपये देने के लिए कहा जा रहा है.’’
यह शुल्क तुरंत हटाया जाना चाहिए
अल्पसंख्यक आयोग ने कहा, ‘‘दिल्ली वन्यजीव संरक्षण नियम की अधिसूचना के मुताबिक, अभयारण्य में पर्यटन और वैध व्यवसाय के मकसद से अभयारण्य में रहने वाले व्यक्ति से ही शुल्क लिया जा सकता है.’’ आयोग ने कहा कि अपने प्रियजनों की मौत के बाद उनकी अंत्येष्टि और उन्हें दफनाने के मकसद से कब्रिस्तान जाने वाले लोग उक्त अधिसूचना में उल्लिखित दोनों ही श्रेणियों में नहीं आते हैं. इसलिए यह शुल्क तुरंत हटाया जाना चाहिए.
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