Isa Alaihis Salam and Imam Mahdi Alaihissalam: इस्लामी रिवायतों के मुताबिक, कयामत के करीब इमाम मेहदी (अ.स.) के जहूर (प्रकट होने) के बाद हजरत ईसा अलैहिस्सलाम का दमिश्क में नुजूल (अवतरण) होगा. उनके दौर में सलीब टूटेगी, जुल्म खत्म होगा और दुनिया में अदल, अमन और इंसाफ कायम होगा.
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Jesus (Isa Alaihis Salam) Advent Story: कयामत के करीब का वह मंजर, जब आसमान से इंसाफ उतरेगा और जमीन अम्न से भर जाएगी. इस्लामी रिवायतों में हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के नुजूल का बयान कुछ यूं ही है. इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम के जहूर के बाद दमिश्क में सुबह की नमाज के वक्त उनका उतरना, फरिश्तों के साये में उनकी तशरीफआवरी और इमामत को लेकर विनम्रता का वह लम्हा. यह सब सिर्फ एक वाकया नहीं, बल्कि इंसाफ, रहमत और हक की जीत का पैगाम है.
सलीब का टूटना, जुल्म का खात्मा और इंसानियत को दीने-हक की दावत- हजरत ईसा अलैहिस्सलाम की वापसी दुनिया को आखिरी मंजिल तक ले जाने वाले उस दौर की शुरुआत मानी जाती है. जहां अदल-ओ-अमन हर तरफ छा जाएगा. यही वजह है कि मुसलमान उन्हें न सिर्फ मानते हैं, बल्कि उन पर पूरे यकीन के साथ ईमान रखते हैं.
इस्लामी रिवायतों के मुताबिक, कयामत के करीब इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम के जहूर के चंद बरस बाद एक बेहद अहम और हैरतअंगेज वाकया पेश आएगा. बताया जाता है कि हजरत ईसा अलैहिस्सलाम का नुजूल दमिश्क, जो सीरिया की राजधानी है, में सुबह की नमाज के वक्त, अकामत के बाद होगा. उस वक्त का मंजर बेहद खास होगा, जब हजरत ईसा अलैहिस्सलाम अपनी दोनों हथेलियां फरिश्तों के परों पर रखे हुए आसमान से तशरीफ लाएंगे.
रिवायतों के मुताबिक, हजरत ईसा अलैहिस्सलाम की तशरीफआवरी पर इमाम मेहदी अलैहिस्सलाम नमाज की इमामत से पीछे हट जाएंगे और उनसे इमामत करने की दरख्वास्त करेंगे, लेकिन हजरत ईसा अलैहिस्सलाम इमाम मेहदी से ही नमाज की इमामत करने के लिए कहेंगे. यह वाकया विनम्रता और उम्मत की कियादत के उस अंदाज को बयान करता है, जिसका जिक्र इस्लामी रिवायतों में मिलता है.
हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के नुजूल का बयान खुद हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने भी किया है. रिवायतों में कहा गया है कि नाजिल होने के बाद हजरत ईसा अलैहिस्सलाम सलीब को तोड़ेंगे, खिंजीर को खत्म कर देंगे और तमाम लोगों को दीने-हक की दावत देंगे. उनके जमाने में अदल और इंसाफ का बोलबाला होगा और दुनिया में ऐसा अम्न कायम होगा, जिसकी मिसालें दी जाती हैं.
इसी दौर से जुड़ी रिवायतों में यह भी कहा गया है कि हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के जमाने में बकरी और शेर एक साथ चरते फिरते और पानी पीते नजर आएंगे. यह तस्वीर उस अम्न और सुकून की ओर इशारा करती है, जो उस वक्त दुनिया में कायम होगा. बताया जाता है कि हजरत ईसा अलैहिस्सलाम इस दुनिया में 40 बरस तक जिंदा रहेंगे और पूरी दुनिया में अम्नो-अमान कायम करने के बाद उनकी वफात हो जाएगी.
इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक, दुनिया को उसकी आखिरी मंजिल तक ले जाने वाले हजरत ईसा अलैहिस्सलाम ही हैं, जिन्होंने अपनी पहली जिंदगी में आखिरी नबी हजरत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की आमद की खबर दी थी. वहीं, दोबारा आने पर भी वह उनकी नबूवत का इकरार करेंगे. इस तरह हजरत ईसा अलैहिस्सलाम इस्लाम के आगाज से लेकर उसके अंजाम के वक्त तक, दोनों ही अहम मोड़ों पर मौजूद नजर आते हैं. इन्हीं तमाम वजहों से मुसलमान हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को मानते हैं और उन पर ईमान रखते हैं.
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