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Israel News: ग़ज़ा में जारी संघर्ष और भारी मानवीय तबाही के बाद प्रकृति ने इजरायल को बड़ा झटका दिया. इसकी वजह है इजरायल की जनसंख्या वृद्धि में तेजी ठहराव, जो यहूदी देश के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में सामना आया है. जिन नीतियों और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर इजरायल अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेल रहा है, उसी दौर में देश के भीतर एक ऐसा जनसांख्यिकीय संकेत उभर आया है, जिसने नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है.
साल 2025 में इजरायल की जनसंख्या वृद्धि दर 1 फीसदी से नीचे गिरकर 0.9 फीसदी रह गई है, जो 1948 में देश की स्थापना के बाद पहली बार हुआ है. इजरायल के सामाजिक-आर्थिक संस्थान टॉब सेंटर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट ऐतिहासिक है. रिपोर्ट बताती है कि देश के इतिहास में इससे पहले सिर्फ दो बार जनसंख्या वृद्धि दर 1.5 फीसदी से नीचे आई थी. दोनों ही बार 1980 के दशक की शुरुआत में. साल 1981 में यह 1.42 फीसदी और 1983 में 1.35 फीसदी दर्ज की गई थी, लेकिन 2025 में 0.9 फीसदी की दर अब तक की सबसे कम है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 तक इजरायल की कुल आबादी 1 करोड़ 1 लाख 48 हज़ार (10,148,000) तक पहुंच चुकी है। यह संख्या 1948 की तुलना में 12 गुना से अधिक है, लेकिन अहम बात यह है कि आबादी बढ़ने की रफ्तार अब स्पष्ट रूप से धीमी पड़ गई है. एक समय ऐसा था जब इजरायल की वार्षिक जनसंख्या वृद्धि दर कम से कम 1.5 फीसदी मानी जाती थी. यहां तक कि 2015 में यह दर 2.0 फीसदी तक रही थी. अब स्थिति यह है कि इजरायल की वृद्धि दर विकसित देशों के समूह ओईसीडी की औसत दर लगभग 0.6 फीसदी के काफी करीब पहुंच गई है.
टॉब सेंटर की रिपोर्ट में गिरावट के तीन मुख्य वजह बताई गई है. पहला है जन्म दर में कमी, दूसरा मृत्यु दर में वृद्धि और प्रवासन (माइग्रेशन). रिपोर्ट बताती है कि जहां पश्चिमी देशों की तुलना में इजरायल में जन्म दर अब भी अपेक्षाकृत स्थिर रही है, वहीं मृत्यु दर धीरे-धीरे बढ़ रही है. इसके साथ ही देश छोड़कर जाने वाले नागरिकों की संख्या भी चिंता बढ़ा रही है. डेमोग्राफर्स के मुताबिक, साल 2024 में करीब 82,700 इजरायली नागरिक देश छोड़कर चले गए थे और यह रुझान 2025 में भी जारी रहा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ जनसांख्यिकीय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध इजरायल की अर्थव्यवस्था, सामाजिक नीतियों और लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय संघर्षों से है. लगातार जंग, सुरक्षा, अस्थिरता और आर्थिक दबावों ने लोगों के फैसलों को प्रभावित किया है. खासकर युवा और कामकाजी आबादी के बीच इसका असर ज्यादा देखा गया है.
नेतन्याहू सरकार ने इस स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए संकेत दिए हैं कि जन्म दर बढ़ाने के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी. इनमें परिवार सहायता कार्यक्रम, सामाजिक लाभ और आव्रजन से जुड़ी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं. सरकार का कहना है कि वह जनसंख्या संतुलन को दोबारा मजबूत करने के लिए कदम उठाएगी. दूसरी ओर, विपक्ष ने इस गिरावट को मौजूदा सरकार की नीतियों की नाकामी करार दिया है. इजरायली विपक्षी दलों का कहना है कि अस्थिर हालात और गलत प्राथमिकताओं ने देश को इस मुकाम तक पहुंचाया है.