ईरान और हमास से निपटने के बाद अब इसराइल और अमेरिका का नया निशाना तुर्किये होगा, जो उस इलाके में इसराइल के हितों की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है. तुर्किये लम्बे अरसे से इस खित्ते में इस्लाम का नया खलीफा बनने की भी फिराक में है, जो अरब देशों की आंख में हमेशा से खटकता रहता है. लेबनान के बाद इसराइल का खूनी पंजा सीधे तुकिये की गर्दन पर होगा लेकिन इससे पहले उसे एक बार NATO से बाहर निकलने के लिए ट्रम्प जैसे सनकी शासक को मनाने भर की देर है.
Trending Photos
)
नई दिल्ली: ईरान को दहलाने की साजिश तो बस एक ट्रेलर थी, क्योंकि असली फिल्म का खतरनाक मंजर अब लेबनान की सरहदों से होता हुआ टर्की की दहलीज तक जा पहुंचा है. नेतन्याहू का गेम प्लान इतना ख़तरनाक है कि वो शतरंज की बिसात पर एक-एक करके मिडिल ईस्ट के उन तमाम मोहरों को साफ कर देना चाहते हैं जो ग्रेटर इजरायल के सपने के बीच में दीवार बनकर खड़े हैं. ईरान और लेबनान को आग की भट्टी में झोंकने के बाद अब इजरायल की नजर टर्की पर है, क्योंकि उसे पता है कि इस इलाके में अगर कोई ताकतवर फौज उसे सीधी चुनौती दे सकती है तो वो सिर्फ टर्की है.
इस पूरी बिसात का सबसे हैरान करने वाला दांव वो है जिसमें नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका नाटो से अपना हाथ खींच ले ताकि टर्की पर हमला करने का रास्ता साफ हो जाए. साल 1949 में बना नाटो और 1952 में उसमें शामिल हुआ टर्की आज इजरायल की आंखों में इसलिए खटक रहा है, क्योंकि नाटो का आर्टिकल 5 टर्की की ढाल बना हुआ है. आर्टिकल 5 के मुताबिक़ अगर किसी नेटो कंट्री पर हमला होता है, तो ये ज़िम्मेदारी नेटो मेंबर्स की है कि वो सपोर्ट करें. तो ऐसे में अमेरिका की मजबूरी होगी के वो टर्री के साथ खड़ा हो. ये इजरायल कभी नहीं चाहेगा कि टर्की को निशाना बनाते वक्त अमेरिका टर्की हिफाजत के लिए मैदान में उतरे.
इजरायल की ये चाल बेहद गहरी है, क्योंकि वो जानता है कि जब तक अमेरिका नाटो का हिस्सा है तब तक टर्की पर हाथ डालना मतलब पूरी दुनिया से सीधे टकराना होगा. इसीलिए नेतन्याहू का सारा जोर ट्रंप और उनके करीबियों को इस बात पर राजी करने में लगा है कि अमेरिका नाटो से बाहर आ जाए. अगर अमेरिका नाटो से बाहर होता है, तो नाटो की कमर टूट जाएगी और टर्की की वो फौलादी सेक्योरिटी छिन जाएगी जो उसे सात दहाईयों से एक बड़ी ताकत बनाए हुए है और फिर इजरायल के पास टर्की की तरफ बढ़ने का खुला रास्ता होगा.
ग्रेटर इजरायल के एजेंडे में टर्की को एक बड़े रोड़े की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि अर्दोआन की अगुवाई में टर्की लगातार मुस्लिम मुल्कों का लीडर बनने की कोशिश कर रहा है, और इजरायल की एक्सपेनशन पॉलिसी की मुख़ालिफ़त कर रहा है. ईरान के बाद अगर मिडिल ईस्ट में कोई मुल्क अपनी जंगी ताकत और रसूख के दम पर इजरायल के मंसूबों को नाकाम कर सकता है तो वो सिर्फ टर्की है.
अगर इजरायल अपने इस प्लान में कामयाब रहता है, और अमेरिका को नाटो से दूर करने में कामयाब हो जाता है, तो समझिए कि मिडिल ईस्ट में एक ऐसी जंग छिड़ेगी जिसकी आग की लपटें यूरोप तक को अपनी चपेट में ले लेंगी. टर्की की फौज दुनिया की सबसे बेहतरीन फौज में गिनी जाती है, और उसे कमजोर करने के लिए इजरायल अब डिप्लोमेसी और खूफिया ऑपरेशंस का इस्तेमाल भी कर सकता है.
इजरायल अब ट्रंप को ये समझाने में जुटा है कि नाटो अमेरिका के लिए बोझ बन चुका है, और उसे अपनी राह अलग कर लेनी चाहिए. ये पूरी कहानी अब उस मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां दोस्ती और दुश्मनी के पुराने मायने बदल रहे हैं, और नया वर्ल्ड ऑर्डर इजरायल के मफ़ाद के हिसाब से लिखने की कोशिश की जा रही है. अगर टर्की इस चक्रव्यूह में फंस गया तो मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा हमेशा के लिए बदल जाएगा और दुनिया एक ऐसी तबाही देखेगी जिसका अंदाजा आज किसी को भी नहीं है.
इसे भी पढ़ें: ग़ज़ा और ईरान के बाद अब तीसरे मुस्लिम देश में मासूम बच्चों का सामूहिक कत्लेआम कर रहा इजरायल