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Jaipur Bomb Blast 2008: कोर्ट का बड़ा फैसला, 4 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

Jaipur Bomb Blast Case: 2008 जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट केस में कोर्ट ने चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. 17 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने 600 पन्नों का फैसला सुनाया. सरकार की ओर से 112 सबूत, 1192 दस्तावेज और 125 पेज की दलीलें पेश की गईं.

Jaipur Bomb Blast 2008: कोर्ट का बड़ा फैसला, 4 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

Jaipur Bomb Blast Case: राजस्थान की राजधानी जयपुर में 17 साल पहले हुए सीरियल बम धमाकों के दौरान जिंदा मिले बम के मामले में राजस्थान हाई कोर्ट ने आज यानी 8 अप्रैल को चार मुस्लिम नौजवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. यह मामला जयपुर के चांदपोल इलाके में रामचंद्र मंदिर के पास मिले एक जिंदा बम से जुड़ा है, जो 13 मई 2008 को हुए सीरियल बम विस्फोटों के बाद बरामद किया गया था.

हाई कोर्ट ने चारों आरोपियों शाहबाज हुसैन, मोहम्मद सरवर आजमी, मोहम्मद सैफ और मोहम्मद सफीउर्रहमान को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होना) और धारा 18 (आतंकी साजिश) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

चार दिन पहले, गत 4 अप्रैल को सीरियल ब्लास्ट मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने इन चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था. मंगलवार को सजा पर बहस के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सजा पर बहस के दौरान सरकारी वकील और विशेष लोक अभियोजक (पीपी) सागर ने कहा, "आरोपियों ने समाज में भय फैलाने की नीयत से गंभीर अपराध किया है. इन पर कोई रहम नहीं किया जाना चाहिए."

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इससे पहले दी दी गई थी फांसी की सजा
इससे पहले दिसंबर 2019 में जयपुर ब्लास्ट मामले में निचली अदालत ने सरवर आजमी, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सलमान और सैफुर्रहमान को फांसी की सजा सुनाई थी. वहीं, पांचवें आरोपी शाहबाज को संदेह के लाभ पर बरी कर दिया गया था. जिन चार लोगों को सजा सुनाई गई थी, उन्होंने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 29 मार्च 2023 को चारों को बरी कर दिया और शाहबाज हुसैन को बरी करने के फैसले पर भी मुहर लगा दी

क्या है पूरा मामला?
साल 2008 में 13 मई को जयपुर शहर के कई इलाकों में सिलसिलेवार धमाके हुए थे. इन धमाकों में 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 170 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे. शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे चौड़ा रास्ता, ट्रिपोलिया बाजार और हवामहल के आसपास इन धमाकों से दहशत फैल गई थी. जांच में सामने आया कि कुछ जगहों पर बम तो फटे, लेकिन कुछ जगहों पर टाइमर से लैस बम जिंदा मिले थे. इन्हीं जिंदा बमों के मामले में अब कोर्ट ने फैसला सुनाया है.

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