Assam Demolition 2025: जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने असम के मुस्लिम इलाकों में घरों, मस्जिदों और स्कूलों पर बुलडोजर चलाने का विरोध किया. संगठन ने इसे धार्मिक भेदभाव बताया और पुनर्वास व मुआवजे की मांग की.
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Assam Demolition 2025: हाल ही में असम के ग्वालपाड़ा ज़िले में सैकड़ों मुसलमानों के घरों पर बुलडोज़र चलाया गया. इस कार्रवाई के बाद, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक टीम ने ग्वालपाड़ा का दौरा किया है. इस दौरे का नेतृत्व जमीयत महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने किया. प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया और वहां के लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं. जमीयत ने वहां के लोगों को हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया. यह जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के निर्देश पर हुआ है.
प्रतिनिधिमंडल में मौलाना अब्दुल कादिर, मौलाना महबूब हसन, मौलाना फ़ज़लुल करीम, मौलाना इज्जत अली, मौलाना अबुल हाशिम समेत कई प्रमुख सदस्य शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नाम ज़िला मजिस्ट्रेट को एक ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यह तोड़फोड़ केवल उन्हीं इलाकों में की गई जहां बंगाली मुसलमान ज़्यादा हैं, जबकि अन्य समुदायों को छुआ तक नहीं गया. इससे स्पष्ट होता है कि यह कार्रवाई धार्मिक भेदभाव और पूर्वाग्रह से प्रेरित थी.
जमीयत का कहना है कि प्रभावित परिवार पिछले 70-80 सालों से वहां रह रहे हैं और वे सभी भारतीय नागरिक हैं. ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ के कारण कई लोग पहले भी विस्थापित हुए थे. ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कई मस्जिदें, स्कूल, मदरसे और ईदगाह भी ध्वस्त कर दिए गए हैं. नवंबर 2023 से जुलाई 2025 तक चली इस कार्रवाई में 21 मस्जिदें, 44 स्कूल-मदरसे और 9 ईदगाह ध्वस्त कर दिए गए.
सरकार से जमीयत ने की ये बड़ी मांग
जमीयत ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित लोगों का जल्द से जल्द पुनर्वास किया जाए और स्थायी व्यवस्था होने तक उन्हें अस्थायी भोजन और आश्रय दिया जाए. संगठन ने यह भी कहा है कि असम में सरकारी ज़मीन उपलब्ध है, जिस पर इन लोगों को बसाया जा सकता है. जमीयत ने स्वयं राहत शिविरों में भोजन और आवास की व्यवस्था शुरू कर दी है.