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Arshad Madani on Assam Muslims: जमीअत उलमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की अहम बैठक संगठन के मुख्यालय में अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में देश की मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर गहरी चिंता जताई गई. इस बैठक में असम में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ते भेदभाव, मदरसों और मस्जिदों पर हमले और मुस्लिम परिवारों पर बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा भी उठा. साथ ही गाजा में हो रहे नरसंहार का भी जिक्र हुआ.
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों की समस्याएं खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. एक विवाद थमता नहीं कि दूसरा खड़ा कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि देश में हिंदू-मुस्लिम के नाम पर राजनीति हो रही है और यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है. मौलाना मदनी के मुताबिक, आज की स्थिति बताती है कि भारत फासीवादी ताकतों की गिरफ्त में है और सांप्रदायिक ताकतों को खुली छूट मिल चुकी है.
उन्होंने साफ कहा कि जमीअत की लड़ाई किसी समुदाय या संगठन से नहीं बल्कि सरकार से है, क्योंकि नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार का ही कर्तव्य है. इसलिए जमीअत अदालतों और कानून के रास्ते संघर्ष कर रही है और यही उसका तरीका है.
असम में बुलडोजर एक्शन पर भड़के मौलाना
असम में हो रही बुलडोजर कार्रवाई पर मौलाना मदनी ने कहा कि यह सिर्फ मुस्लिम बस्तियों पर हमला नहीं है बल्कि संविधान और कानून को रौंदने जैसा है. उनका आरोप है कि लगभग 50 हजार मुस्लिम परिवारों को सिर्फ धर्म के नाम पर बेघर किया गया है. उन्होंने कहा कि ये बस्तियां नई नहीं बल्कि बहुत पुरानी हैं. अगर ये अवैध होतीं तो पिछली सरकारें वहां सार्वजनिक सुविधाएं क्यों देतीं?
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह इस मामले का स्वतः संज्ञान ले और असंवैधानिक कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करे. मौलाना मदनी ने असम के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह मुसलमानों को “मियां मुस्लिम” कहकर खुलेआम नफरत फैलाते हैं और उन्हें वोटर लिस्ट से हटाने की बात करते हैं, जो संविधान के खिलाफ है.
इजरायल की जमीयत ने की कड़ी निंदा
इजरायल गाजा में नरसंहार कर रहा है. जमीयत ने इस बैठक में इस नरसंहार के खिलाफ आवाज उठाई है और गाजा में हो रहे नरसंहार की निंदा की है. जमीअत ने कहा कि एक लाख से ज्यादा लोगों की हत्या और नागरिकों को भूख-प्यास से मरने देना मानवता पर कलंक है. समिति ने अमेरिका को भी इस हिंसा का बड़ा जिम्मेदार बताया और कहा कि वह इजरायल का खुला समर्थन कर रहा है. जमीअत ने भारत सरकार से मांग की कि वह इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए और उसके साथ सभी सामरिक संबंध तोड़े.साथ ही दुनियाभर के नेताओं से सीजफायर की मांग की है.