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नई दिल्ली/शोएब रज़ा: एक अगस्त को हिंदुस्तान में बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा. कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र इस बार यूपी हुकूमत की जानिब से गाइड्लाइन भी जारी की गई है और इसमें साफ़ कहा गया है कि बकरीद की नमाज़ ईदगाह या मस्जिद में ना पढ़ी जाए और सोशल डिस्टेसिंग पर अमल किया जाए. हुकूमत की गाइड्लाइन के बाद अब मुसलमानों की सबसे बड़ी तंज़ीम जमीयत उलेमा ए हिन्द ने एक नोटिफिकेशन जारी करके मुसलमानों को सलाह दी है कि सभी मुसलमान हुकूमत की जानिब से जारी की गई गाइडलाइंस पर अमल करें. बेहतर ये रहेगा कि कि सूरज निकलने के बीस मिनट बाद मुख़्तसर तौर पर लोग नमाज़ और ख़ुतबा अदा करके कुर्बानी करलें और गंदगी को इस तरह से दफ़्न किया जाए कि उससे बदबू ना हो.
मौलाना अरशद मदनी की जानिब से जारी किए गए इस खत में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश समेत सभी सूबों के मुसलमान ऐसे जानवरों की कुर्बानी से परहेज़ करें जिन पर पाबंदी हैं, सिर्फ ऐसे ही जानवरों की कुर्बानी की जाए जो कानूनी तौर से जायज़ है. अगर किसी जगह पर कुछ लोग ऐसे जानवरों की कुर्बानी करने से रोकते हैं जो कानूनी तौर पर जायज़ हैं तो वहां के मुसलमानों को चाहिए कि इंतेज़ामिया की मदद लेकर कुर्बानी का अमल करें. अगर किसी जगह ये भी मुमकिन ना हो, तो ऐसे इलाकों में जाकर कुर्बानी करें, जहां कुर्बानी हो रही हो. जमीयत ने ये भी सलाह दी है कि अगर बड़े जानवर की कुर्बानी नहीं हो पा रही हैं और बकरें की कुर्बानी करने में कोई अहल है तो वो बकरें की ही कुर्बानी कर ले और ये सब बातें इंतेज़ामिया के दफ्तर में दर्ज करा दें ताकि मुस्तक़बिल में कोई दिक्क़त ना हो.
कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र कई सूबों में लॉकडाउन लगा हुआ है और इस बीच बकरीद का त्योहार भी आ गया है, ऐसे में किसी तरह से माहोल खराब ना हो और त्योहार भी आराम और एहतियात के साथ मन जाएं. हुकूमत और इंतेज़ामिया लगातार इस कोशिश में लगे हुए हैं. इन्हीं तमाम मामलों के मद्देनज़र मुस्लिम तंज़ीमों की तरफ से भी लगातार अपील और सलाह दी जारी की जा रही है.
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