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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंKashmir: घाटी की बदल रही फिजां; कट्टर नेता छोड़ रहे अलगाववाद का रास्ता; देशभक्त बनी फरीदा

Kashmir: घाटी की बदल रही फिजां; कट्टर नेता छोड़ रहे अलगाववाद का रास्ता; देशभक्त बनी फरीदा

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी संगठन तेजी के साथ मेन स्ट्रीम सियासत से जुड़ रहे हैं. इस बीच एक बड़ी अलगाववादी नेता फरीदा बहनजी ने अलगाववाद का रास्ता छोड़ने का ऐलान कर दिया है. अपने हलफनामे में उन्होंने कई और बाते कही है. पूरी जानकारी के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

 

Kashmir: घाटी की बदल रही फिजां; कट्टर नेता छोड़ रहे अलगाववाद का रास्ता; देशभक्त बनी फरीदा

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करने वाली फरीदा बहनजी ने अपनी राह बदल ली है. उन्होंने एक हलफनामा देकर कहा है कि वह अब भारत विरोधी किसी भी संगठन से रिश्ता नहीं रखेंगी. इसी के साथ उन्होंने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों गुटों से भी अब किसी तरह का नाता न रखने का ऐलान कर दिया है. 

हुर्रियत कॉंफ्रेंस से भी तोड़ा रिश्ता
जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी विचार का समर्थन करने वाली और मास मूवमेंट की सद्र फरीदा बहनजी ने गुरुवार 10 अप्रैल को बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि वह अब जम्मू-कश्मीर को अलग करने वाली किसी भी संगठन से प्रत्यक्ष या प्रोक्ष रूप से रिश्ता नहीं रखेगी. उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी पार्टी हुर्रियत कॉंफ्रेंस समेत देश दुनिया के वह संगठन जो जम्मू-कश्मीर को भारत का अखंड हिस्सा नहीं मानते हों उनसे अब कोई वास्ता नहीं रखेगी.  
 
कुछ ही महीने में 11 संगठनों ने अलगाववाद का रास्ता छोड़ने का किया फैसला
वहीं, ज्यादातर अलगाववादी नेता जेलों में बंद हैं और उनके समर्थकों ने उनसे किनारा कर लिया है, और बीते कुछ महीनों में 11 अलगाववादी संगठनों ने अलगाववाद से तौबा कर लिया है. गुजिश्ता मंगलवार को जब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह श्रीनगर में थे, दो अलगाववादी संगठनों ने खुद को भारतीय संविधान के प्रति अपने आप को वफादार बताया था.

जम्मू कश्मीर के नौजवान आतंकवाद से बना रहे हैं दूरी
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अगस्त 2019 में धारा 370(a) को निरस्त कर दिया गया है. इसके बाद सूबे की स्थिति में लगातार बदलाव दिख रहे हैं. जम्मू-कश्मीर की जनता आतंकवादियों और अलगाववादियों से मुंह मोड़ चुकी है. कश्मीर को तोड़ने और भारत से आजादी लेने वाले नारे अब कश्मीर में नहीं सुनने को मिलता है. इस में सरकार और सेना भी अहम रोल निभा रही है. कशमिरी नौजवानों के लिए अलग से योजना चलाना और वक्त-वक्त पर जागरुकता अभियान चलाना इन सब चीजों से नौजवानों के सोच में बदलाव देखने को मिला है.

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