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Bihar Election: कल्याणपुर सीट पर मुस्लिम फैक्टर का जलवा, जानें 2025 में किसे मिलेगा फायदा?

Kalyanpur Assembly Election 2025: कल्याणपुर विधानसभा चुनाव 2025 में मुस्लिम मतदाता गेमचेंजर साबित हो सकते हैं. 14 फीसद से ज्यादा मुस्लिम वोट बैंक किसके पक्ष में जाएगा, यह तय करेगा सीट का भविष्य.
 

Bihar Election: कल्याणपुर सीट पर मुस्लिम फैक्टर का जलवा, जानें 2025 में किसे मिलेगा फायदा?

Kalyanpur Assembly Election 2025: बिहार में इस साल यानी 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं. राजनीतिक पंडित और मतदाता अभी से अपने-अपने विधानसभा सीटों पर कैंडिडेट्स की जीत-हार का आकलन कर रहे हैं. ऐसे में आज हम पूर्वी चंपारण जिले की कल्याणपुर विधानसभा सीट का विश्लेषण करने जा रहे हैं. हम आपको बताएंगे कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में किस पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा. आइए जानते हैं....

दरअसल, कल्याणपुर विधानसभा सीट बिहार की उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां हर इलेक्शन में नतीजे बदलते रहते हैं. इस सीट पर कोई भी उम्मीदवार दोबारा इलेक्शन नहीं जीत पाया है, इसलिए इस सीट को अनिश्चित सीट भी कहा जाता है. कल्याणपुर सीट पर हमेशा जातीय समीकरण बदलता रहता है, लेकिन इसमें एक अहम किरदार मुस्लिम वोटर्स भी हैं. इस सीट पर मुस्लिम वोटर्स का लगातार प्रभावा बढ़ रहा है.

साल 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद इस सीट का गठन हुआ था. इसमें कोटवा प्रखंड पूरा और कल्याणपुर प्रखंड की 18 पंचायतें शामिल हैं. यह पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है और 2020 तक यहां कुल मतदाता संख्या 2,56,790 थी, जो 2024 तक बढ़कर 2,63,186 हो गई.  साल 2020 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक, यहां कुल मुस्लिम मतदाता संख्या 36,977 (14.40%) थी. यह प्रतिशत भले ही बहुत बड़ा न दिखे, लेकिन इस सीट पर मुकाबला हमेशा करीबी होता है.

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2020 में राजद प्रत्याशी मनोज कुमार यादव ने बीजेपी के सचिन्द्र प्रसाद सिंह को महज 1,193 वोटों से हराया था. ऐसे में मुस्लिम वोटर्स का झुकाव किसी भी दल के पक्ष में चुनावी परिणाम तय कर देता है. साल 2010 में जदयू की रजिया खातून ने जीत हासिल की थी. मुस्लिम मतदाता तब नीतीश कुमार की "सुशासन" छवि और जदयू-बीजेपी गठबंधन के साथ रहे. साल 2015 में जदयू और राजद के महागठबंधन बनने के बाद मुस्लिम वोट सीधे राजद-जदयू गठबंधन को मिले, लेकिन महागठबंधन का कैंडिडेट हार गया और बीजेपी उम्मीदवार सचिन्द्र प्रसाद सिंह की जीत हुई.

साल 2020 के चुनाव में बदल गया था रुख

वहीं, विधानसभा चुनाव 2020 में जब जदयू एनडीए में लौट आई और बीजेपी ने यहां से उम्मीदवार उतारा, मुस्लिम वोटों ने पूरी तरह राजद का रुख किया. इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी महज 1,193 वोटों से हार गई और राजद के टिकट पर मनोज यादव विधायक बन गए. यानी साफ है कि जब भी जदयू और राजद साथ रहे, मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा गठबंधन के खाते में गया. जबकि  के बीजेपी पक्ष में मुस्लिम वोट शायद ही कभी एकमुश्त पड़े हों.

लोकसभा चुनाव 2024 में मुस्लिम रुख

2024 लोकसभा चुनाव में कल्याणपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को 14,014 वोटों की बढ़त मिली. हालांकि यह आंकड़ा 2019 (36,261) और 2014 (25,775) से काफी कम था. इसका सीधा मतलब है कि मुस्लिम वोटरों ने बीजेपी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर विपक्षी गठबंधन का साथ दिया लेकिन चूंकि लोकसभा चुनाव में मोदी फैक्टर मजबूत था, बीजेपी ने बढ़त बनाई.

2025 चुनाव और मुस्लिम फैक्टर
2025 का चुनाव कल्याणपुर में बेहद दिलचस्प होगा. बीजेपी 2024 लोकसभा इलेक्शन में अपनी मजबूती को विधानसभा चुनाव तक ले जाना चाहती है. दूसरी तरफ राजद और जदयू गठबंधन मुस्लिम वोटों को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की कोशिश में है. कल्याणपुर विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मुस्लिम वोटरों की भूमिका निर्णायक होती है. उनकी संख्या भले ही 15 फीसद से कम हो, लेकिन हर बार करीबी मुकाबले में उनका रुख नतीजे को बदल देता है. 2025 के चुनाव में भी यही होगा.

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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