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Karnataka Hijab Row: कर्नाटक के हिजाब मामले पर हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है. सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि मामले का फैसला नहीं आने तक कोई भी मज़हबी पोशाक नहीं पहनी जाएगी. अदालत ने कहा कि जब तक मामले का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक सभी मज़हबी चीजों को धारण करने की जिद नहीं करनी चाहिए.
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामला सुलझने तक छात्रों को कोई भी ऐसा कपड़ा, चाहे हिजाब हो या भगवा स्कार्फ, नहीं पहनना चाहिए जो लोगों को भड़काए. चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस. दीक्षित और जस्टिस खाजी जयबुन्नेसा मोहियुद्दीन की तीन सदस्यीय बेंच ने अंतरिम आदेश दिया.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "हम हिजाब विवाद के मामले में अंतरिम आदेश देना चाहते हैं. हम हर दिन मामले की सुनवाई करेंगे." बेंच ने कहा कि राज्य में शांति लौटनी जरूरी है और स्कूल और कॉलेज जल्द ही खुलने चाहिए. इसके साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी.
हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील देवदत्त कामत ने अदालत से उनकी आपत्ति पर गौर करने की गुज़ारिश की, कि ऐसा हुक्म अनुच्छेद 25 के तहत उनके मुवक्किल के संवैधानिक अधिकारों को निलंबित करने के बराबर होगा. कामत ने कहा, "यह उनके हक का पूर्ण हनन होगा." इस पर चीफ जस्टिस अवस्थी ने कहा कि यह व्यवस्था सिर्फ कुछ दिन के लिए है जब तक कि मामला हल नहीं हो जाता है और उनसे सहयोग करने की गुज़ारिश की है. जस्टिस दीक्षित ने बुधवार को इस मामले को चीफ जस्टिस अवस्थी के पास इस राय के साथ भेज दिया था कि चीफ जस्टिस मामले पर गौर करने के लिए बड़ी बेंच के गठन का फैसला कर सकते हैं.
हिजाब विवाद पिछले दिनों उडुपी में शुरू हुआ था जब कुछ छात्राओं को महाविद्यालयों में हिजाब पहनकर आने से रोक दिया गया. इसके बाद हिंदू छात्र भगवा गमछा लेकर स्कूल-कॉलेज आने लगे. बाद में राज्य के बाकी जगहों पर भी पक्ष-विपक्ष में प्रदर्शन होने लगे.
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