Kazi Nazrul Islam: एक इमाम का बेटा 'दुखु मियां' कैसे बन गया विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम ?

Kazi Nazrul Islam: करीब 5 दशक पहले, 29 अगस्त 1976 को इस दुनिया से रुखसत होने वाले काजी नजरुल इस्लाम ने उपनिवेशवाद, असमानता और कट्टरता के खिलाफ कविता को हथियार बना दिया था. उनकी कवितायेँ शब्द नहीं बल्कि क्रान्ति की आग उगलती थी, जिसे ब्रिटिश हुकूमत खौफ खाती थी.

Kazi Nazrul Islam: एक इमाम का बेटा 'दुखु मियां' कैसे बन गया विद्रोही कवि काजी नजरुल इस्लाम ?

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Hussain Tabish

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हुसैन ताबिश जी न्यूज़ में एसोसिएट न्यूज़ एडिटर हैं. उन्हें फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क पर ख़बरों से खेलने का 18 सालों का अनुभव है. Zee से पहले वो HT Media, Amar Ujala, Prasar Bharti, Raj Express, Forward Press, Mahanagar Media Network Ltd, BIG Pvt. Ltd. और देशबंधु अखबार में सेवाएं दे चुके हैं. वह ICSSR फंडेड रिसर्च प्रोजेक्ट में रिसर्च एसोसिएट रह चुके हैं. बिहार में मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा का निम्न स्तर, अकुशल मजदूरों के पलायन और इंसेफेलाइटिस पर रिपोर्टिंग के लिए उन्हें फेलोशिप मिल चुका है. शिक्षा से एम.फिल और पी.एचडी हुसैन ताबिश पत्रकार के अलावा एक मीडिया शोधार्थी, शिक्षक और प्रशिक्षक भी हैं, फिर भी खुद को जर्नलिज्म का इंटर्न मानते हैं. राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, मानवाधिकार, जेंडर सेंसिटिविटी, सोशल जस्टिस और माइनॉरिटी इश्यूज उनके प्रिय विषय हैं.(उनतक पहुँचने का पता mohammad.tabish@India.com