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लॉकडाउन में मदरसा टीचर ने किया था एक 'महापाप'; कोर्ट ने सुनाई 187 साल की सजा

Kerala News: भारत में यौन शोषण और बलात्कार के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं. हर साल हजारों महिलाएं, लड़कियां और यहां तक कि बच्चे भी इस जघन्य अपराध का शिकार होते हैं.

लॉकडाउन में मदरसा टीचर ने किया था एक 'महापाप';  कोर्ट ने सुनाई 187 साल की सजा

Kerala News: केरल के कन्नूर में एक मदरसा टीचर को एक नाबालिग लड़की से रेप के इल्जाम में 187 साल जेल की सजा सुनाई गई है. लेपर एमबीए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने यह सजा सुनाई. आरोपी शिक्षक ने कोविड-19 महामारी के लॉकडाउन के दौरान 16 साल की स्टूडेंट का दो साल तक यौन उत्पीड़न किया था. 

विशेष अदालत हज आर राजेश ने अलाकुद पंचायत के उदयगिरि निवासी 41 साल के मुहम्मद रफी को पीएसीएस अधिनियम और आईपीसी के प्रावधानों के तहत एक नाबालिग लड़की से बार-बार बलात्कार करने का दोषी पाया. कोर्ट ने दोषी पर 9 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

50 साल की सजा
विशेष अदालत ने रफी ​​को पाक्सो अधिनियम की धारा 5 (एस) (यौन उत्पीड़न का बार-बार अपराधी) के तहत 50 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. यौन शोषण 2021 तक जारी रहा. उसने उसे घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी भी दी.

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एक दिन में 90 रेप केस
भारत में यौन शोषण और बलात्कार के मामले लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं. हर साल हजारों महिलाएं, लड़कियां और यहां तक कि बच्चे भी इस जघन्य अपराध का शिकार होते हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन औसतन 90 से ज्यादा रेप केस दर्ज होते हैं. यह संख्या सिर्फ रिपोर्ट हुए मामलों की है, जबकि असल आंकड़े इससे कहीं ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि कई पीड़ित डर, शर्म या सामाजिक दबाव के चलते शिकायत दर्ज नहीं करा पाते.

महिलाएं नहीं, पुरुष और ट्रांसजेंडर भी नहीं है सुरक्षित
यौन शोषण सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष और ट्रांसजेंडर समुदाय भी इसके शिकार होते हैं. बच्चों के खिलाफ हो रहे यौन अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है. इसके लिए सरकार ने POCSO Act (Protection of Children from Sexual Offences Act) जैसे कानून बनाए हैं, लेकिन कानून होने के बावजूद अपराध थम नहीं रहे.

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