राजस्थान: अजमेर में स्थित चिल्ला शरीफ गुफा ख्वाजा गरीब नवाज की इबादत से जुड़ी एक पवित्र जगह है, जहां कहा जाता है कि पहाड़ ने उनकी जुदाई में आंसू बहाए थे. आज भी वहां उनका रूहानी असर महसूस किया जाता है.
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राजस्थान न्यूज: राजस्थान के अजमेर में सैकड़ों साल बाद भी एक ऐसी गुफा है जहां ख्वाजा गरीब नवाज के याद में पहाड़ ने आंसू बहाया था, और वह आंसू आज भी मौजूद है. बड़ी तादाद में अकीदतमंद याहं जाते हैं. सुफीजम में यकीन रखने वाले लोगों के नजदीक इस जगह का काफी अहमियत है. आज हम इस खबर के माध्यम से इस खास गुफा के बारे में जानेंगे.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, इस गुफा को ख्वाजा गरीब नवाज के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 561 हिजरी में जब ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह आलेही ने अजमेर के कृषि घटा पर कदम रखा और पहाड़ी के नीचे उन्होंने अल्लाह की खूब इबाद की थी. इस वजह से इस पहाड़ी को ख्वाजा चिल्ला साहब के नाम से जाना जाता है.
जुदाई में खूब रोया पहाड़!
इस पहाड़ी को देखने के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हैं. कहा जाता है कि जब कि ख्वाजा गरीब नवाज ने इस पहाड़ी पर इतनी शिद्दत से इबादत की कि जब यहां से वह रुखसत हुए तो पहाड़ उनकी जुदाई में खूब रोया था. माना जाता है कि उसी पहाड़ का आंसू सैकड़ों साल गुजर जाने के बाद भी मौजूद है. एक मानयता यह भी है कि ख्वाजा गरीब नवाज इसी गुफा से आना सागर को अपने कासे में उतार लिया था.
हिंदू मुस्लिम एकता का मिसाल है यह दरगाह
गौरतलब है कि चिल्ला शरीफ (उस पहाड़ी) का रखरखाव करने वाले सैयद इकबाल सईद चिश्ती के मुताबिक हजरत ख्वाजा गरीब नवाज के साथ उनके जद्दा अमजद हजरत ख्वाजा फखरुद्दीन रहमतुल्लाह आलेही भी हिंदुस्तान तशरीफ लाए थे. उन्हीं के खानदानवाले पीढ़ी दर पीढ़ी ख्वाजा के बारगाह में खिदमत करता है, और रखरखाव करते हैं.
ख्वाजा गरीब नवाज हिंदुस्तान में सुफिजम का जनक माना जाता है, जिन्होंने हिंदुस्तान में इस्लाम का प्रचार प्रसार किया. आज भी ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह को हिंदू-मुस्लिम एक्ता के रूप में देखा जाता है, और देश के सभी प्रधानमंत्री यहां चादर पोशी कराते हैं, यही नहीं, दुनिया के भी कई मुल्क हर साल यहां चादर भेजते हैं. यही वजह है कि इनकों हिंद का बादशाह बोला जाता है.