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लखनऊः इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने बृस्पतिवार को केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू को (Union Minister of State for Home Ajay Mishra Teni's son Ashish Mishra) लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में जमानत दे ( Ashish Mishra gets bail in the Lakhimpur violence case) दी. इस घटना में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी. न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने इस मामले में मोनू को जमानत दी. अदालत की लखनऊ पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सुनवाई पूरी करने के बाद मिश्रा की याचिका पर 18 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था. घटना की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने पिछले साल नौ अक्टूबर को मिश्रा को गिरफ्तार किया था.
पक्ष-विपक्ष की कोर्ट में दलील
मिश्रा की तरफ से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए एक वाहन के चालक को उकसाया था. याचिका का विरोध करते हुए, अपर महाधिवक्ता वीके शाही ने कहा था कि घटना के समय मिश्रा उस कार में सवार थे जिसने किसानों को कथित तौर पर अपने पहियों के नीचे कुचल दिया था. याचिकाओं पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.
विशेष जांच दल ने कहा है, किसानों की हत्या सुनियोजित साजिश
गौरतलब हैं कि तीन अक्टूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के दौरान आठ लोगों की मौत हो गई थी. यह हिंसा तब हुई थी जब किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे. घटना को कवर करने वाले एक पत्रकार की भी घटना में मौत हो गई. जवाबी हिंसा में भाजपा के तीन कार्यकर्ता मारे गए. घटना के आरोपियों में आशीष मिश्रा का नाम भी शामिल था. घटना में लखीमपुर खीरी हिंसा कांड की जांच कर रहे विशेष जांच दल ने कहा है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों की हत्या की सुनियोजित साजिश थी.
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