गुप्तेश्वर पांडे से भी पहले कई ऐसे अफसर रहे हैं, जो नौकरियां छोड़कर सियासत में आए और सियासत में उन्हें अच्छी इज्ज़त और मुल्क आला ओहदों पर भी काबिज़ हुए.
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नई दिल्ली: बिहार के साबिक डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने हाल ही में VRS (खुद की मर्ज़ी से रिटायमेंट) लेकर सियासत में आने का फैसला किया है और उन्होंने इतवार के रोज़ नीतीश कुमार की कयादत वाली जेडीयू (JDU) का दामन थाम लिया है. अब गुप्तेश्वर पांडे एक नई इनिंग का आगाज़ कर रहे हैं. उन्हें इतवार के रोज़ खुद नीतीश कुमार पार्टी सदस्यता दिलाई.
बता दें गुप्तेश्वर पांडे से भी पहले कई ऐसे अफसर रहे हैं, जो नौकरियां छोड़कर सियासत में आए और सियासत में उन्हें अच्छी इज्ज़त और मुल्क आला ओहदों पर भी काबिज़ हुए. तो आज हम आपको ऐसे 6 बड़े अफसरों के बारे बताने जा रहे हैं जो सरकारी नौकरियां छोड़कर सियासत में आए और एक कामयाब सियासतदान बने.
सुशील कुमार शिंदे (कांग्रेस)
महाराष्ट्र में कांस्टेबल की हैसियत भर्ती हुए थे और सब इंसपेक्टर भी बने. 1971 में पुलिस की नौकरी छोड़कर सियासत में आने के फैसला किया और कांग्रेस ज्वाइन करली. साल 1974 में महाराष्ट्र असेंबली इंतेखाब लड़ा और 5 बार मुतंखब होकर सूबाई असेंबली में पहुंचे. 1992 में राज्यसभा के लिए चुने गए. यहां तक कि उपराष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा था लेकिन हार गए थे. 2003 से 4 तक महाराष्ट्र के सीएम रहे. 2004 में आंध्र प्रदेश के गवर्नर बनाए गए. 2006 में साबिक पीएम मनमोहन सिंह की हुकूमत में ऊर्जा मंत्री बने. 2012-14 तक ग्रह मंत्री रहे.
प्रदीप शर्मा (शिवसेना)
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहे जाने वाले प्रदाप शर्मा 1983 में महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े थे और मुंबई क्राइम ब्रांच का हिस्सा भी रहे. एक जानकारी के मुताबिक प्रदाप शर्मा ने अपने 35 साल के करियर में 150 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं. साल 2019 में महाराष्ट्र असेंबली चुनावों से पहले वीआरएस लने के बाद शिवसेना में शामिल हुए और नाला सोपारा से चुनाव लड़ा जीत नहीं पाए.
सत्यपाल सिंह (भाजपा)
जनवरी 2014 में पुलिस से इस्तीफा देकर फरवरी में भाजपा का दामन थामा. बागपत लोकसभा से चुनाव लड़े और जीत भी हासिल की. साल 2017 में मरकज़ी वज़ीर भी बनाए गए और 2019 लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की.
नमो नारायण मीणा (कांग्रेस)
IPS अफसर और राजस्थान के डीजीपी रह चुके हैं नमो नारायण मीणा को प्रेजिडेंशियल पुलिस मैडल भी मिला है. रिटायर होने के बाद कांग्रेस से जुड़े साल और साल 2004 में लोकसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की. उसके बाद साल 2009 में टोंक से चुनाव लड़ा और दूसरी बार भी जीत हासिल की. 2014 में दौसा लोक सभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार गए. जानकारी के मुताबिक यह हार उन्हें अपने छोटे भाई से मिली थी. जिनका नाम हरीश मीणा है.
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