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नई दिल्ली/शोएब रज़ा: मरकज़ी और दिल्ली हुकूमत के तहत आने वाले अकलियती तबके से जुड़े इदारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. कौमी अकलियती कमीशन से लेकर हज कमेटी ऑफ इंडिया, दिल्ली स्टेट हज कमेटी से लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड तक के सभी इदारे बगैर चैयरमेन के चल रहे हैं.
हज कमेटी ऑफ इंडिया के चैयरमेन की मुद्दत सालों पहले ही खत्म हो गई थी, बाद में वज़ारते अक्लियती अमूर के ज़रिये दो बार कमेटी की मुद्दत को आगे भी बढ़ाया गया लेकिन कमेटी को चैयरमेन नहीं मिला. अब कमेटी की मुद्दत भी खत्म हो चुकी है लेकिन अभी तक भी कमेटी के इंतेखाबात की कोई सुगबुगाहट नहीं है. हज कमेटी ऑफ इंडिया के आखिरी चेयरमैन महबूब अली क़ैसर थे.
ऐसा ही हाल कौमी अकलियती कमीशन का है जिसमें चैयरमेन के कई ओहदे महीनों से खाली पड़े हैं. गय्यूरुल हसन कमीशन के चैयरमेन थे जिनका तीन साल का काम पूरा गया था. मौजूदा कौमी अकलियती कमीशन एक नायब सद्र और एक मेम्बर के भरोसे चल रहा हैं जबकि चैयरमेन समेत तीन मेम्बर की मुद्दत कुछ महीनों पहले ही पूरी हो चुकी है. अब तक इन मेम्बर्स की तकर्रुरी को लेकर भी कोई हलचल नहीं है.
दिल्ली में मौजूद स्टेट अकलियती इदारों का हाल तो और भी खराब हैं, यहां दिल्ली स्टेट हज कमेटी और दिल्ली वक्फ बोर्ड के चैयरमेन के ओहदे दिल्ली असेंबली इंतेखाबात होने के बाद से ही खाली पड़े हैं, लगातार इनको भरने की मांग होती रही है क्योंकि काम बुरी तरह से मुतास्सिर हो रहा है, लेकिन आज तक भी दिल्ली हुकूमत ने कोई नोटिफिकेशन इस सिलसिले में जारी नहीं किया. दिल्ली स्टेट हर कमेटी के आखिरी चैयरमेन साबिक विधायक आसिम अहमद थे. वहीं दिल्ली वक्फ बोर्ड के सद्र आम आदमी पार्टी (आप) के MLA अमानातुल्लाह खान थे.
परेशानी सिर्फ यही खड़ी नहीं होती बल्कि दिल्ली अकलियती कमीशन के सद्र की मुद्दत भी 22 जुलाई को पूरी होने जा रही है, यानि कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसे में जल्दी से कमीशन को भी अगला चेयरमेन मिलेगा ये कहना भी मुश्किल हैं.
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