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Imam Ilyasi on Arshad Madani: अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान की आलोचना की है. इमाम उमर अहमद इलियासी ने अरशद मदनी के बयान को देश में डर और अशांति फैलाने वाला बताया और मांग की कि मौलाना को वापस लेना चाहिए. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा, "अरशद मदनी के बयान की जितनी आलोचना की जाए, वह कम है. जिस तरह से उन्होंने यह बयान दिया है, उससे देश में डर का माहौल और अराजकता पैदा होने का अंदेशा है. उन्हें अपना बयान वापस लेना चाहिए और सच्चाई देश को बतानी चाहिए."
मौलाना इलियासी ने की मदनी की आलोचना
उन्होंने अरशद मदनी को करारा जवाब देते हुए कहा, "भारत के मुसलमानों की तुलना अमेरिका और लंदन के मुसलमानों से नहीं की जा सकती है. भारत ने मुसलमानों के लिए राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश दिए." इस दौरान, उमर अहमद इलियासी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान सिविल सर्विस में सबसे ज्यादा मुसलमान आए हैं. अरशद मदनी पर उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ मुसलमानों को मिला है, जिसकी कभी उन्होंने तारीफ नहीं की."
अल-फलाह पर मौलाना का पलटवार
अल फलाह यूनिवर्सिटी पर मदनी के बयान पर भी उमर अहमद इलियासी ने पलटवार किया. इमाम ने कहा, "उन्हें (मदनी) आतंकवाद के विरोध में बयान देना चाहिए था. लाल किले के पास धमाका भारत नहीं, बल्कि उसकी आत्मा पर प्रहार था. इसका खुलकर विरोध करना चाहिए था, लेकिन अफसोस है कि आपने अल फलाह यूनिवर्सिटी के बारे में बयान दिया, जबकि तीन संदिग्ध लोग उसी यूनिवर्सिटी से पकड़े गए."
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना अरशद मदनी ने भारत में मुसलमानों की बुरी हालत के बारे में बयान दिया था. शनिवार को एक इवेंट में मदनी ने कहा कि भारत में कोई भी मुस्लिम यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर नहीं बन सकता और अगर कोई बन भी गया तो वह आजम खान की तरह जेल में जाएगा. उनके इस बयान पर पॉलिटिकल पार्टियों ने हमला बोला है.