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नई दिल्ली: मुल्क के वज़ारते दाखिला (Home Mnistry) की जानिब से पार्लियामेंट में तब्लीग़ी जमात को कोरोना फैलाने का ज़िम्मेदार बताने को जमीयत उलमा ए हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी ने गुमराहकुन (भ्रामक) करने वाला बताया है और कहा है कि हुकूमत खुद की ज़िम्मेदारी कुबूल करने के बजाय उसे दूसरों पर थोप रही है.
मौलाना मदनी ने कहा कि वज़ारते दाखिला को अपनी ज़िम्मेदारी और पार्लियामेंट के वकार को ध्यान रखना चाहिए और इससे मुतअल्लिक मुल्क की अदालतों, खासकर मद्रास हाई कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसलों का एहतराम करना चाहिए. जिस तरह से बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने तब्लीगी जमात के तअल्लुक में हुकूमत के रवय्ये पर रद्देअमल का इज़हार किया था और उसे आइना दिखाया था.
Ml. Mahmood Madani said the statement of MHA blaming the T. Jamaat for causing to spread coronavirus infection is blatant disregard to the HC verdict. Instead to take positive steps to repair the damage done by taking action against the Tablighis, the Govt has repeated the blame. pic.twitter.com/zuf3C7wO9V
— Jamiat Ulama-i-Hind (@JamiatUlama_in) September 22, 2020
उन्होंने आगे कहा कि होना तो यह चाहिए था कि हुकूमत अपना मुहासिबा करती, पार्लियामेंट में माफी मांगती और गलतियों के इज़ाले (पश्चाताप) के तरीकों का ऐलान करती लेकिन उसने पुरानी बात दोहरा कर न सिर्फ हकीकत से आंखे फेरी हैं बल्कि आईनी ओहदों पर बैठकर अदालत के फैसले को नज़रअंदाज़ किया है.
मौलाना महमूद मदनी ने पिछले आंकड़ों की याद दिलाते हुए कहा कि जिस वक्त तबलीगी जमात का मुद्दा उठा था तो उस वक्त मुल्क में सिर्फ 5 हज़ार शहरी भी कोरोना से मुतास्सिर नहीं थे लेकिन आज यह तादाद 50 लाख को पार गई है और हर दिन नए रिकॉर्ड बनते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुराने हालात की तरह नए हालात का ज़िम्मेदार कौन है. इस पर खामोशी क्यों बरती जा रही है.
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