'ज़मीं पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं', महशर अफ्रीदी के शेर

Mehshar Afridi Poetry: महशर अफ्रीदी ने उर्दू में बहुत सी शायरियां लिखीं हैं. उनमें से एक यह बहुत मशहूर है कि "तुम जो बिछड़े हो जल्दबाजी में, यार तुम रूठ भी सकते थे."

'ज़मीं पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं', महशर अफ्रीदी के शेर
Source: ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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Siraj Mahi

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सिराज माही युवा पत्रकार हैं. देश, दुनिया और मनोरंजन की खबरों पर इनकी अच्छी पकड़ है. ज़ी मीडिया से पहले वह 'ईटीवी भारत' और 'दि संडे पोस्ट' जैसे मीडिया हाउस में काम कर चुके हैं. लिखने-पढ़ने के अलावा इन्हें घूमना और खाना बनाना पसंद है.

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