)
East Champaran Muslim Population: बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव को लेकर अभी तक कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सियासी दलों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक के बाद एक बिहार दौरे कर राज्य में राजनीतिक माहौल बनाने में जुट गए हैं. इसी सिलसिले में पीएम मोदी आज बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी शहर पहुंचे थे, जहां उन्होंने बिहार के विकास के लिए 7217 करोड़ रुपये से ज़्यादा की योजनाओं की घोषणा की. मिशन-चंपारण के तहत इस सौगात का ऐलान किया गया है.
पीएम मोदी हर चुनाव से ठीक पहले चंपारण के मोतिहारी क्यों आते हैं, और चंपारण में बीजेपी की कितनी पकड़ है? चंपारण में मुस्लिम आबादी कितनी है और क्या प्रधानमंत्री मोदी हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए बार-बार चंपारण आते हैं? आज हम आपको विस्तार से बताएंगे. आइए जानते हैं.
बिहार के मोतिहारी में मुसलमानों की आबादी
2011 की जनगणना के मुताबिक, बिहार के मोतिहारी जिले में मुस्लिम आबादी लगभग 21.90 फीसद थी. 2025 में शहर की कुल आबादी लगभग 1.83 लाख होने का अनुमान है, ऐसे में मुस्लिम समुदाय की संख्या लगभग 34,100 हो सकती है. अगर पूरे मोतिहारी तहसील की बात करें, जिसमें गांव भी शामिल हैं, तो वहां मुस्लिम आबादी का हिस्सा लगभग 13.3 फीसद है. चंपारण क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या इतनी ज़्यादा है कि वे चुनाव परिणाम बदल सकते हैं. यही वजह है कि सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक को लुभाने की कोशिश करते हैं. लेकिन इसके बावजूद जिले की अधिकांश सीटें भाजपा के खाते में जाती है.
भाजप के पक्ष में वोटों को जबरदस्त ध्रुवीकरण होता है, और मुस्लिम वोट बेअसर हो जाते हैं. मुस्लिम वोटों के दम पर जीत का गणित बैठने वाली पार्टियों के हाथ खाली रह जाते हैं, और भाजपा या NDA गठबंधन यहां बढ़त हासिल कर लेते हैं. यहां ढाका और कई विधानसभा क्षेत्र में भी मुसलमानों के सर्वाधिक आबादी है लेकिन वो MY समीकरण के बूते जिंदा रहने वाली पार्टी राजद या महागठबंधन के उमीदवार को कामयाब करने में नाकाम रह जाते हैं. 37 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले ढाका विधानसभा क्षेत्र से भी भाजपा अपनी सीट निकाल लेती है.
चंपारण में भाजपा का गढ़
चंपारण क्षेत्र में भाजपा की पकड़ काफी मजबूत है. 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए ने यहां की 21 में से 17 सीटों पर जीत हासिल की थी. इनमें से 15 सीटें भाजपा के खाते में गई थी. वहीं, पूर्वी चंपारण में कुल 12 विधानसभा सीटें हैं. इनमें से 9 पर एनडीए और 3 पर महागठबंधन का कब्जा है. इनमें से 8 सीटों पर भाजपा, 1 पर जदयू और 3 पर राजद ने जीत हासिल की थी. साथ ही पश्चिमी चंपारण में 9 विधानसभा सीटें हैं. 2020 में भाजपा ने 7, जदयू ने 1 और भाकपा-माले ने 1 सीट जीती थी. यह इलाका भाजपा का मजबूत गढ़ है और संजय जायसवाल जैसे दिग्गज यहां से सांसद हैं.
इन सीटों पर है भाजपा की नजर
एनडीए ने 2020 में चंपारण में 4 सीटें गंवा दी थीं. अब वे अगली बार भी यहां जीत हासिल करने की कोशिश में हैं. भाजपा 2020 की जीत को 2025 में दोहराना चाहती है. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे, जिसके कारण चंपारण बेल्ट में बीजेपी को नुकसान हुआ था.
पूर्वी चंपारण की 12 सीटों में से एनडीए को सिर्फ 5 सीटें मिलीं, जबकि महागठबंधन ने 7 सीटें जीतीं. वहीं, पश्चिमी चंपारण की 9 सीटों में से एनडीए को 5 और महागठबंधन को 4 सीटें मिलीं. सीटों के साथ-साथ भाजपा के वोट फीसद में भी गिरावट आई थी. इससे साफ़ है कि नीतीश के एनडीए में रहने से बीजेपी को फ़ायदा होता है, जबकि अलग होने से उसे नुकसान उठाना पड़ता है. पीएम मोदी का यह दौरा मिशन-2025 की शुरुआत माना जा रहा है. इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और जनता तक विकास का संदेश जाएगा.