न दौलत चाहिए, न सत्ता...72 लोगों ने 22 हजार के लश्कर के सामने लिख दिया कुर्बानी का इतिहास

Karbala ki Jung: मुहर्रम के पाक महीने का आगाज हो चुका है. इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने का मुसलमान खास ऐहतराम करते हैं, क्योंकि यह ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. यह महीना कर्बला के शहीदों की याद दिलाता है. 10 मुहर्रम, 61 हिजरी को इमाम हुसैन (रजि.) और उनके 72 साथियों ने जालिम यजीद की 22 हजार के लश्कर सामने घुटने टेकने से इंकार कर दिया.

न दौलत चाहिए, न सत्ता...72 लोगों ने 22 हजार के लश्कर के सामने लिख दिया कुर्बानी का इतिहास
Image Credit: (प्रतीकात्मक एआई तस्वीर)Source: ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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