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Mumbai News: मुंबई के दारुखाना इलाके में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ने कथित अवैध 100 से ज्यादा घरों को गिरा दिया है. इस कार्रवाई के बाद सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं. प्रभावित परिवारों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि मानसून से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई ने गरीब परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है.
स्थानीय लोग और “पोर्ट घर हक संघर्ष समिति” की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि न्यूटेंग रोड इलाके में बीते कुछ दिनों से लगातार तोड़फोड़ की कार्रवाई चल रही थी. आरोप है कि पुलिस ने तड़के करीब 3 बजे पूरे इलाके को घेर लिया था, जबकि सुबह होते ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी गई. लोगों का कहना है कि इस दौरान किसी को आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई और पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया था. प्रभावित लोगों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर दिया गया और महिलाओं को शौचालय तक जाने की अनुमति नहीं दी गई. कई परिवारों ने दावा किया कि उन्हें अपने घरों से सामान तक निकालने का पूरा मौका नहीं मिला.
विरोध कर रहे स्थानीय लोगों का कहना है कि वे सालों से इस इलाके में रह रहे हैं और कई परिवारों के पास पहचान पत्र, बिजली बिल और अन्य दस्तावेज भी मौजूद हैं. उनका आरोप है कि सरकार ने उन्हें कभी वैकल्पिक आवास नहीं दिया, जबकि वे लंबे समय से यहां रहकर काम कर रहे थे. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा, “हम भारतीय नागरिक हैं. हमने इस जमीन पर अपनी जिंदगी बसाई है, लेकिन हमारे साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया. पिछले चार दिनों से हम सड़क पर हैं और कोई हमारी सुनने वाला नहीं है.”
इतने लोग खुले में रहने को हैं मजबूर
प्रेस नोट में दावा किया गया है कि करीब 350 से अधिक लोग अब खुले में रहने को मजबूर हैं. चिलचिलाती गर्मी और आने वाले मानसून को देखते हुए लोगों में डर और गुस्सा दोनों है. प्रभावित परिवारों ने अब इलाके में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है और सरकार से पुनर्वास की मांग की है. लोगों का कहना है कि उन्हें शिवसेना सांसद अरविंद सावंत और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा का समर्थन मिला है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार की नीति में भी साफ कहा गया है कि बिना पुनर्वास योजना के लोगों को बेदखल नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रखी गई.
सामाजिक संगठनों ने की इस कार्रवाई की निंदा
सामाजिक संगठनों का दावा है कि दारुखाना इलाके में कई परिवार 20 से 30 सालों से रह रहे हैं. उनका कहना है कि आजादी के बाद सरकार ने पोर्ट और आसपास के इलाकों में काम करने वाले मजदूरों को यहां बसाया था. हालांकि मुंबई पोर्ट अथॉरिटी की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और प्रभावित लोग पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं.