दिल्ली में हुई मुस्लिम तंजीमों की मीटिंग में फैसला, NPR का नहीं देंगे साथ

जमीअत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना कारी सैय्यद मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी की सदारत में प्रोग्राम का इनेकाद किया, जारी किया सात नुकाती मंशूर

दिल्ली में हुई मुस्लिम तंजीमों की मीटिंग में फैसला, NPR का नहीं देंगे साथ

नई दिल्ली/ शोएब रज़ा की रिपोर्ट : नई दिल्ली में आज शहरियत तरमीमी एक्ट (Citizenship Amendment Act), एनआरसी (National registration Citizen) और एनपीआर (National Population register)को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद हेड क्वार्टर में ‘जागरुक भारतीय नागरिकों के बीच चर्चा'' मौजू से एक अहम और फैसलाकुन प्रोग्राम इनेकाद किया गया,जिसमें सात नुकाती मंशूर पास किए गए.

इस प्रोग्राम के कनवीनर जमीअत-उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema Hind) के जनरल सेक्रेट्री मौलाना महमूद मदनी और ज्वाइंट कन्वीनर कमाल फारूकी थे। प्रोग्राम में सभी सभी मज़हब से जुड़े हुए देश के दानिश्वरों , सामाजिक कारकुनान, दलित लीडरान और सभी मुस्लिम तंजीमों के लोग शामिल हुए।

करीब चार घंटे चली इस लंबी बातचीत और कई आईनी मसलों पर मुतालबा के बाद आपसी रज़ामंदी से एक मंशूर पास किया गया, जिसका नाम ‘दिल्ली घोषणापत्र’दिया गया है। इस मंशूर में वाज़ेह तौर से जल्द होने वाले एनपीआर को मुस्तरद करने के लिए ऐलान किया गया और अवाम से कहा गया कि एनपीआर एक अप्रैल से 30 सितम्बर 2020 तक होगा। डेटा जमा करने वाले घर घर जाएंगे, हमें संजीदगी के साथ उनसे तआवुन करने से इनकार करना चाहिए और उन्हें किसी तरह की जानकारी मुहैया नहीं करानी चाहिए।

मीटिंग में एक मसौदा समिति भी बनाई गई थी जिसके सद्र साबिक मरकज़ी वज़ीर के रहमान खान थे। इस समिति में मशहूर तजज़ियाकार अबू सालेह शरीफ, ईसाई लीडर जान दयाल, अनिल चमड़िया, एमएमआर अंसारी, कासिम रसूल इलियासी, धनराज वंजारी और ओवैस सुल्तान खां शामिल थे। कमेटी ने अपने तजवीज़ को लेकर कानूनी पहलुओं का भी तजज़िया किया.
 
फिर मौजूद लोगों के इत्तेफाक़ राए से सात नुकाती मंशूर पास किया है

1. हम वाज़े तौर से एनपीआर मुस्तरद करते हैं क्योंकि यह हिंदुस्तानी आईन के आर्टिकल14 की खुली खिलाफ़वर्ज़ी है। एनपीआर शहरियत कानून 1955 और शहरियत ज़ाब्ता 2003 के तहत एनआरसी तैयार करने की सिम्त में डेटा जमा करने के लिए पहला कदम है। यह साफ तौर पर इम्तेयाज़ी सलूक है, लोगों को बांटने वाला, बॉयकाट करने वाला और गैर आईनी है .और यह समाज को मज़हब, जात, तब्का और जिंसियत की बुनियाद पर अलग करने वाला है.।

2. एनपीआर का अमल 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक चलेगा। डेटा जमा करने वाले घर-घर का दौरा करेंगे। हमें शायस्तगी के साथ उन्हें तआवुन करने या किसी भी तरह की जानकारी मुहैया कराने से मना करना चाहिए।

3. हम सभी रियासती सरकारों से एनपीआर अमल को फौरी तौर से बंद करने की अपील करते हैं। इसके अलावा हम कानूनी-नज़्म व नस्क़ से जुड़ी सभी एजेंसियों से अपील करते हैं कि वे हिंदुस्तानी लोगों के एहतेजाजी मुज़ाहिरों के आईऩी हक का एहतेराम करें।

4. हम मुख्तिलफ़ रियासतों ख़ास तौर पर उत्तर प्रदेश में पुलिस फायरिंग में निशाना बनाकर मारे गए पुर अम्न मुज़ाहरीन की स्ख़त अल्फाज़ में मज़म्मत करते हैं। उत्तर प्रदेश पुर अदमे रज़ामंदी को सरकारी ढांचे की तरफ से दबाए जाने का अड्डा बन चुका है। हम पुलिस फायरिंग, इमलाक को नुकसान पहुंचाने, बेकसूरों की गिरफ्तारी और मुज़ाहरीन शहरियों से पेनाल्टी की अज़ीब वसूली की मज़म्मत करते हैं।

5. हम मुल्क भर के कई शाहीन बागों में चलने वाले बिना किसी मज़हबी तफरीक़ के नौजवानों, तलबा और ख्वातीन के पुर अम्न मुज़ाहिरों की सताइश करते हैं।

6. हम मुल्क मुखालिफ़ और ऐसे दूसरे काले कानूनों के तहत लोगों की जानिबदाराना तौर पर की गई गिरफ्तारियों की मज़म्मत करते हैं। इसके साथ ही हम उनकी फौर और बिना शर्त रिहाई और उनके खिलाफ़ लगाए गए सभी तरह के इल्ज़ामों को खारिज करने की मांग करते हैं। इन मुज़ाहिरों के दौरान मुल्क भर में हुई जिस्मानी नुकसान, ज़हनी तनाव, इमलाक को हुए नुकसान और सामानों की के नुकसान के लिए मुनासिब मुआवजा दिए जाने की मांग करते हैं।

7. हम लोगों से हर हाल में अम्न बनाए रखने और किसी तरह के उकसावे, बहकावे और मुहिम को खत्म करने की साजिशों में न आने की अपील करते हैं।