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AMU Name Change Proposal: पिछले 10 सालों में भारत के शहरों, कस्बों, सड़कों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों का बड़े पैमाने पर नाम बदला गया है. खासकर नाम बदलने का ट्रेंड 2017 के बाद तेज हुआ, जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुआई में बीजेपी की सरकार बनी. सरकार बनने के फौरन बाद मुख्यमंत्री योगी ने कई उर्दू नाम वाले गांव, शहर, सड़क और रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने का काम शुरू किया. उनका तर्क था कि ये बदलाव सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय गौरव को दर्शाते हैं.
इस ट्रेंड को देखते हुए देश के दूसरे बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने अपने राज्यों में भी कई शहरों, कस्बों और सार्वजनिक स्थलों के नाम बदल दिए. यह प्रक्रिया अब सियासत और सांस्कृतिक रणनीति का हिस्सा बन गई है. इन सबके बीच यूपी के अलीगढ़ जिले का नाम बदलने की मांग उठ रही है, लेकिन अब यूपी सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त ठाकुर रघुराज सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम हरिगढ़ विश्वविद्यालय रखने की मांग की है. इस मांग के बाद राज्य का सियासी तापमान बढ़ गया है. बयान देने के बाद मंत्री मुस्लिम स्कॉलर और विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं.
नाम बदलने की मांग पर बवाल
ठाकुर रघुराज सिंह के बयान के फौरन बाद AMU के स्टूडेंट्स में विरोध की लहर दौड़ गई. स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव सांप्रदायिक और विवादास्पद है. उन्होंने इसे विश्वविद्यालय की पहचान और ऐतिहासिक महत्व को चुनौती देने वाला कदम बताया. वहीं मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की. मुफ्ती अकबर कासमी ने कहा कि यदि मंत्री साहब में वाकई हिम्मत है, तो उन्हें पहले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ‘हिंदू’ शब्द हटाकर दिखाना चाहिए. उनके मुताबिक, किसी भी यूनिवर्सिटी का नाम बदलना सीधे तौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा कर सकता है.
मंत्री ने दिया था ये बयान
ठाकुर रघुराज सिंह ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर हरिगढ़ यूनिवर्सिटी किया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि जिस जमीन पर यह यूनिवर्सिटी खड़ा है, उस पर मुल्क का पैसा खर्च किया जाता है, इसलिए इसे किसी विशेष धर्म या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
मंत्री ने दिया ये तर्क
मंत्री का कहना है कि अलीगढ़ भूमि भोले बाबा और संत हरिदास की भी रही है, इसलिए यूनिवर्सिटी का नाम हरिगढ़ होना चाहिए ताकि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक बने. मंत्री ने यह भी जोर दिया कि यूनिवर्सिटी में एससी, एसटी और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू किया जाना चाहिए ताकि अधिकतम छात्रों को शिक्षा का समान अवसर मिल सके.