Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam733166
Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंएकता की बड़ी मिसाल: 35 सालों से श्मशान घाट की हिफाज़त कर रही है मुस्लिम खातून

एकता की बड़ी मिसाल: 35 सालों से श्मशान घाट की हिफाज़त कर रही है मुस्लिम खातून

 श्मशान घाट में आखिरी रसूमात के लिए आने वाले लोगों को पानी, लकड़ी समेत दूसरी ज़रूरतों के सामान मुहैया कराती आ रही हैं. जिसके बदले में वो किसी से भी एक भी रुपया नहीं लेतीं.

एकता की बड़ी मिसाल: 35 सालों से श्मशान घाट की हिफाज़त कर रही है मुस्लिम खातून

गुवाहाटी: जहां आज कुछ लोग मज़हब के नाम पर एक दूसरे को मारने-मरने पर उतारू हो जाते हैं. वहीं हिंदुस्तान की असल विरासत यानी गंगा-जमनी तहज़ीब की हिफाज़त करने वाले भी अभी कुछ लोग ज़िंदा हैं. जो किसी भी शख्स को मज़हब या ज़ात के चश्मे से नहीं देखते. एक ऐसी ही मिसाल पेश कर रही हैं असम की शाहानूर. 55 साल की शाहानूर करीब 35 सालों से एक श्मशान घाट की रखवाली कर रही हैं. 

fallback

बताया जा रहा है कि जिस जगह पर श्मशान घाट है वहां आसपास में एक भी हिंदू परिवार नहीं है और श्मशान घाट की कमेटी के लोग भी आसपास नहीं रहते. जिसके चलते शाहानूर पिछले 35 सालों से श्मशान घाट की साफ-सफाई करना, पेड़ पौधे लगाना और उनकी हिफाज़त करना के साथ-साथ श्मशान घाट में आखिरी रसूमात के लिए आने वाले लोगों को पानी, लकड़ी समेत दूसरी ज़रूरतों के सामान मुहैया कराती आ रही हैं. जिसके बदले में वो किसी से भी एक भी रुपया नहीं लेतीं.

Add Zee News as a Preferred Source

fallback

शाहानूर एक मुस्लिम खातून हैं और रोज़ा-नमाज़ रखने के साथ-साथ श्मशान घाट में लोगों को खिदमत करके अपने आप पर फख्र महसूस करती हैं. शाहानूर पिछले 35 सालों से इसे इंसानी खिदमत के तौर पर ये काम करती आ रही हैं. आज के समाज को एक धागे में बांधने की शाहानूर की यह कोशिश काबिले तारीफ है.

Zee Salaam LIVE TV

TAGS

Trending news