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मोहम्मद रजा उल्लाह/जयपुर: राजस्थान की कांग्रेस सरकार की तरफ से कल बजट जारी किया गया था. इस बजट को लेकर जहां हर तरफ कोई ना कोई अपनी खुशी का इजहार करता हुआ नजर आ रहा है तो वहीं अल्पसंख्यक समाज के लोग गहलोत सरकार को लेकर खासा नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.
अल्पसंख्यक संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से इस बजट में अल्पसंख्यक को नजरअंदाज किया गया है शायद ही किसी बजट में किया गया है.
बजट में मुसलमानों को नजर अंदाज करने को लेकर राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ, राजस्थान मुस्लिम परिषद, राजस्थान हज वेलफेयर सोसाइटी और राजस्थान मदरसा पैरा टीचर्स की तरफ से गहरी नाराजगी का इजहार किया गया है. इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि हम लोगों को उम्मीद थी कि गहलोत सरकार उर्दू को लेकर कोई न कोई वैकेंसी का ऐलान करेगी लेकिन महज सात छात्रावास और मदरसों में स्मार्ट क्लासरूम बनाने की घोषणा की है यह काफी कम है.
पिछले बजट में उर्दू शिक्षक भर्ती को लेकर घोषणाएं की गई थीं जो अभी तक पूरी नही हुईं. इस बजट से उम्मीद की जा रही थी कि उर्दू शिक्षक भर्ती को पूरा करने को लेकर घोषणाएं की जाएंगीं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका.
मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि 90 फीसद वोट कांग्रेस को गए हैं लेकिन फिर भी हर जगह हम को नजरअंदाज किया गया है.
इन लोगों का यह भी कहना है कि जो विधायक जश्न मना रहे हैं उन विधायकों को बस रेड बत्ती की गाड़ी चाहिए थी इसके अलावा और कुछ नहीं चाहिए था इसलिए वह कुछ बोल नहीं रहे हैं.
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि अगर उनकी परेशानियों पर गौर नहीं किया गया तो वह बड़े पैमाने पर सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे.
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