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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंमुसलमान हो, नहीं मिलेगा एडमिशन... नफरती प्रिंसिपल मैडम को अब जाना पड़ेगा जेल!

'मुसलमान हो, नहीं मिलेगा एडमिशन...' नफरती प्रिंसिपल मैडम को अब जाना पड़ेगा जेल!

Nagpur School News: नागपुर के दयानंद आर्य कन्या विद्यालय में मुस्लिम समुदाय की एक छात्रा को सिर्फ धर्म के आधार पर एडमिशन देने से मना कर दिया गया. पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

प्रतीकात्म फोटो
प्रतीकात्म फोटो

Nagpur News: देशभर में मुसलमानों के खिलाफ नफरत इतनी बढ़ गई है कि कुछ नफरती लोग मुसलमानों के साथ फूटी कौड़ी भी देखना पसंद नहीं करते. मुसलमानों के साथ दोयम दर्जे का नागरिक जैसा व्यवहार किया जा रहा है और कई जगहों पर उनके आर्थिक बहिष्कार का आह्वान किया जा रहा है. ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के नागपुर से आया है, जहां एक मुस्लिम लड़की को इसलिए एडमिशन नहीं दिया गया क्योंकि वह मुस्लिम थी. इस घटना के बाद प्रशासन ने स्कूल प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.

दरअसल, नागपुर में मीर सुमन मसंद नाम की महिला 8 मई को दयानंद आर्य कन्या स्कूल में अपनी बेटी का 6वीं क्लास में एडमिशन कराने गई थी. छात्रा की मां ने जब स्कूल प्रशासन से सीटों के बारे में पूछा तो स्कूल टीचर अनीता आर्य ने कहा कि कोई सीट खाली नहीं है, लेकिन जब सुमन ने इस पर और जानकारी ली तो पता चला कि स्कूल के सचिव राजेश लालवानी और प्रिंसिपल सिमरन ज्ञानचंदानी ने मौखिक रूप से कहा था कि स्कूल में मुस्लिम समुदाय की लड़कियों को एडमिशन नहीं दिया जाएगा.

छात्रा की मां का बड़ा दावा
छात्रा की मां सुमन मसंद ने इस भेदभाव पर सवाल उठाया और स्कूल प्रबंधन की इस सोच की शिकायत महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग से की. इसके बाद जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी भी मामले की जांच करने स्कूल पहुंचे. सुमन का दावा है कि उनके पास स्कूल के सचिव राजेश लालवानी की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है, जिसमें वह मुस्लिम समुदाय की छात्राओं को एडमिशन न देने की बात कह रहे हैं. इस मामले में पुलिस ने जून में स्कूल के सचिव राजेश लालवानी, प्रिंसिपल सिमरन ज्ञानचंदानी और शिक्षिका अनीता आर्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.

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आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (ए) के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें जानबूझकर किसी धर्म या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना और दुर्भावना फैलाना शामिल है. दर्ज मुकदमा में यह भी कहा गया है कि इस भेदभाव के कारण लड़की और उसका परिवार मानसिक रूप से परेशान है. राज्य अल्पसंख्यक आयोग और जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है. यह घटना समाज में धार्मिक सद्भाव और समानता की भावना के लिए आघातकारी है. देश के संविधान में प्रत्येक नागरिक को समान शिक्षा का अधिकार है और धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना कानूनी अपराध है. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.

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