Israeli Attorney General: गली बाहरव-मिआरा ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि रोनेन बार को हटाने का फैसला प्रक्रियागत रूप से गलत था और यह नेतन्याहू के निजी हितों के टकराव से प्रभावित है.
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Israeli Attorney General: इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट (Shin Bet) के प्रमुख रोनेन बार की बर्खास्तगी पर देश में सियासी घमासान मच गया है. इस बर्खास्तगी को लेकर पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और अटॉर्नी जनरल गली बाहरव-मिआरा आमने-सामने हैं. अटॉर्नी जनरल ने इज़राइल की सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि वह सरकार के इस फैसले को रद्द कर दे, क्योंकि यह निजी हितों से प्रेरित और कानून के खिलाफ है.
दरअसल, 21 मार्च को नेतन्याहू सरकार ने रोनेन बार को उनके पद से हटाने का फैसला लिया है. इस फैसले के पीछे की वजह बताया गया कि सरकार और बार के बीच अब “भरोसे की कमी” रह गई है लेकिन नेतन्याहू और शिन बेट प्रमुख के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे. सरकार के इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट ने इस बर्खास्तगी पर 8 अप्रैल तक रोक लगा दी है.
अटॉर्नी जनरल का तर्क
गली बाहरव-मिआरा ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि रोनेन बार को हटाने का फैसला प्रक्रियागत रूप से गलत था और यह नेतन्याहू के निजी हितों के टकराव से प्रभावित है. उन्होंने कहा कि नेतन्याहू के करीबी सहयोगियों पर चल रही आपराधिक जांचों के बीच यह फैसला लिया गया, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं.
एक मामले में नेतन्याहू के दो सहयोगियों को "कतर-गेट" स्कैंडल के तहत गिरफ्तार किया गया है. इन पर कतर सरकार से संदिग्ध व्यापारिक संबंधों और गोपनीय सूचनाएं लीक करने का इल्जाम है. अटॉर्नी जनरल का कहना है कि इन मामलों से बचने के लिए नेतन्याहू ने बार पर दबाव बनाया था.
रोनेन बार का खुला खत
शिन बेट प्रमुख रोनेन बार ने भी सुप्रीम कोर्ट को एक खुला पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने बताया कि पीएम नेतन्याहू ने उनसे बार-बार गुजारिश की है कि वह अदालत में उनके खिलाफ चल रही गवाही को रोकने के लिए "सुरक्षा कारणों" का हवाला दें, लेकिन बार ने यह करने से इनकार कर दिया. उन्होंने लिखा, "शिन बेट प्रमुख का पद किसी राजनीतिक 'भरोसे' से जुड़ा नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे स्वतंत्र और पेशेवर होना चाहिए."
नेतन्याहू की पार्टी का पलटवार
प्रधानमंत्री की पार्टी लिकुड ने कहा कि असली टकराव तो अटॉर्नी जनरल और शिन बेट प्रमुख के बीच है. दोनों मिलकर फर्जी केस बना रहे हैं और कानून को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. अब सभी की नजर 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है, जो यह तय करेगा कि क्या शिन बेट प्रमुख की बर्खास्तगी वैध थी या राजनीतिक दबाव का नतीजा था.