)
Bihar Hijab Controversy: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में एक मुस्लिम महिला के चेहरे से हिजाब हटा दिया, इस घटना से पूरे देश में गुस्सा फैल गया है. समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन समेत कई सांसदों ने नीतीश कुमार के इस काम पर हैरानी जताई है. विपक्ष ने भी इस घटना को लेकर बीजेपी और नीतीश सरकार की कड़ी आलोचना की है. अब इमारत-ए-शरिया समेत कई धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है और मुख्यमंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है.
संगठनों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान एक महिला डॉक्टर के हिजाब को लेकर जिस तरह का बर्ताव किया गया, वह न सिर्फ आपत्तिजनक है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है. इमारत शरिया और दूसरे संगठनों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि अगर किसी महिला की पहचान या सुरक्षा को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया थी, तो उसे पहले ही पूरा कर लिया जाना चाहिए था. नियुक्ति पत्र बांटने के दौरान मंच पर ऐसी स्थिति बनाना किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता.
'माफी मांगे नीतीश कुमार'
बयान में साफ कहा गया कि यह मामला सिर्फ हिजाब का नहीं है, बल्कि एक महिला की गरिमा, इज्जत और पवित्रता से जुड़ा हुआ है. संगठनों ने जोर देकर कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब सिर्फ़ एक पहनावा नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक पहचान, निजी सम्मान और आत्मसम्मान का प्रतीक है. इसे सार्वजनिक मंच पर सवालों के घेरे में लाना निंदनीय है. राष्ट्रीय और धार्मिक संगठनों ने कहा कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम या सार्वजनिक प्लेटफ़ॉर्म पर इस तरह की हरकतें स्वीकार्य नहीं हो सकतीं. उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को न सिर्फ़ संबंधित महिला डॉक्टर से, बल्कि बिहार की आधी आबादी यानी महिलाओं से भी माफी मांगनी चाहिए.
मुस्लिम संगठनों ने दी चेतावनी
मुस्लिम संगठन का कहना है कि इस घटना से केवल एक महिला नहीं, बल्कि सभी महिलाओं की भावनाओं और सम्मान को ठेस पहुंची है. संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक टकराव या असहमति का नहीं है, बल्कि महिलाओं की मानवीय गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता के सम्मान का सवाल है. ऐसी घटनाएं समाज में असुरक्षा की भावना को जन्म देती हैं और सामूहिक चेतना पर गहरा असर डालती हैं.