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Assam Bulldozer Action: असम में पिछले कई महीनों से बुलडोजर एक्शन जारी है. इस कार्रवाई के खिलाफ पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. एक तरफ़, मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर मुसलमानों को परेशान करने के लिए उनके घर तोड़ रही है. दूसरी तरफ, सरकार का तर्क है कि वह अलग-अलग इलाकों में अवैध अतिक्रमण और निर्माण हटाने के नाम पर कार्रवाई कर रही है. इस कार्रवाई से राज्य की राजनीति गरमा गई है.
इस बीच असम के इंडीजीनस मुस्लिम समुदाय यानी गोरिया, मोरिया और देसी मुसलमानों के घरों में भी बुलडोज़र चलने का नोटिस भेजा गया. जबकि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले ही सार्वजनिक मंच से कहा था कि राज्य के इंडीजीनस मुसलमानों पर बुलडोज़र का असर नहीं पड़ेगा और उनके घरों को तोड़ा नहीं जाएगा. इसी मामले को लेकर राज्य विवाद जारी है. मुस्लिम संगठनों ने सवाल उठाया है कि सीएम के बयान का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है.
बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मुस्लिम संगठन
इसी मामले को लेकर गुवाहाटी के दिसपुर प्रेस क्लब में आज को असम गोरिया परिषद की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई. परिषद के कारगुज़ार सदर मोईनुलहक़ ने कहा कि सरकार और प्रशासन सीएम के वादे की अनदेखी कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कई इंडीजीनस मुसलमान परिवारों को नोटिस भेज दिया गया है और यह कहा गया है कि जल्द ही उनके घरों पर भी बुलडोज़र चलाया जाएगा. मोईनुलहक़ ने कहा, “मुख्यमंत्री ने साफ़ कहा था कि इंडीजीनस मुस्लिम समुदाय पर बुलडोज़र की कार्रवाई नहीं होगी. लेकिन आज हालात बिल्कुल उल्टे हैं. गोरिया, मोरिया और देसी मुसलमानों के घरों को भी नोटिस दिया जा रहा है. यह सरासर अन्याय है. सरकार को तुरंत इन नोटिसों को रद्द करना चाहिए.”
मुस्लिम संगठन की ये मांग
गोरिया परिषद ने सरकार से यह मांग की कि राज्य के इंडीजीनस मुस्लिमों को सुरक्षा दी जाए. परिषद का कहना है कि इन समुदायों का असम की संस्कृति और समाज में अहम योगदान है. इन्हें बाहरी या अवैध तरीके से बसने वालों के साथ मिलाकर देखना न सिर्फ़ गलत है बल्कि उनके आत्मसम्मान और पहचान पर चोट करना है. मोईनुलहक़ ने आगे कहा कि अगर प्रशासन इसी तरह कार्रवाई करता रहा तो राज्य के इंडीजीनस मुसलमानों में असुरक्षा और बेचैनी और बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि परिषद लोकतांत्रिक तरीक़े से अपनी आवाज़ उठाती रहेगी और सरकार से अपील करती है कि निष्पक्ष रवैया अपनाए.
असम के गुवाहाटी से शरीफुद्दीन की रिपोर्ट